- Hindi News
- माताओं ने व्रत रखकर मांगी संतान के लंबी उम्र की दुआ
माताओं ने व्रत रखकर मांगी संतान के लंबी उम्र की दुआ
जांजगीर| पुत्रकल्याण की कामना को लेकर पुत्रवती माताओं ने मंगलवार को \\\'बेटा जुतिया का निर्जला व्रत रखा। जीवित पुत्रिका माता महालक्ष्मी की पूजा की गई। आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी बेटा जुतिया के रूप में मनाई जाती है। छत्तीसगढ़ में शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में इस त्योहार को लेकर मान्यता परंपराएं प्रचलित हैं।
अखंड सुहाग के लिए तीजा और पुत्र की दीर्घायु के लिए बेटा जुतिया का निर्जला व्रत रखने की परंपरा वर्षों से चली रही है। मंगलवार को पुत्रवती माताओं ने दिन भर निर्जला उपवास रखकर संतान के सुखी जीवन की कामना की। सुबह धागे पर आठ गाठें बांधकर उसे गले में धारण किया गया, इसे बेटा जुतिया के नाम से जाना जाता है। यह व्रत काफी कठिन होता है, पर किसी भी मां के लिए बच्चों की आयु और उनकी सलामती से बड़ी कोई चीज नहीं होती। वे बच्चों के लिए कुछ भी कर सकतीं हैं। जीवित पुत्रिका व्रत भी कुछ ऐसा ही व्रत है। इस व्रत में कई कठिन नियमों का पालन करना होता है। व्रत के दौरान अन्न और जल ग्रहण नहीं किया गया। रात में पीपल पेड़ की डालियों को आंगन में रखकर उसकी पूजा भी की गई।
आज मातृ नवमी
पितृपक्षकी नवमीं 17 सितंबर को मनाई जाएगी, जिसे \\\'मातृ नवमींÓ भी कहा जाता है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में दिवंगत पूर्वजों के निमित्त तर्पण किया जाता है, इसी प्रकार नवमी पर दिवंगत माता, सास की आत्मा की शांति के लिए महिलाओं द्वारा सौभाग्यवती स्त्रियों को भोजन कराकर वस्त्रादि दान करने का भी विधान है। पं. रामलोचन तिवारी के अनुसार दिवंगत सौभाग्यवती स्त्रियों का श्राद्ध बुधवार नवमीं पर सुबह किया जा सकता है। छोटे बच्चों का श्राद्ध त्रयोदशी को, अकाल मृत्यु को प्राप्त लोगों का श्राद्ध चतुर्दशी को किया जाना चाहिए।