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बेजान हो चुकी शकुंतला को सर्जरी से मिला नया जीवन

5 वर्ष पहले
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काम के दौरान सीमेंट की बोरी गिरने से बेजान हुई शकुंतला को डॉक्टर ने सर्जरी कर नया जीवन दिया है। सीमेंट की बोरी उसके गर्दन पर गिरी थी। जिससे उसके दोनों हाथ व पैर काम नहीं कर रहे थे। सर्जरी से अब सभी अंग काम करने लगे हैं।

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा की रहने वाली शकुंतला यादव (30) निर्माणाधीन मकान में 17 दिन पहले काम कर रही थी। इसी दौरान सीमेंट की बोरी उसके ऊपर आ गिरी। गर्दन में बोरी गिरने से वह बेहोश हो गई। इसके बाद हाथ-पैर चलना बंद हो गया। साथ ही सांस लेने में तकलीफ होने लगी। उसे जांजगीर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में पता चला कि गर्दन की हड्डियां खिसक गई है। इसका असर रीढ़ की हड्‌डी पर पड़ा है।

इसी वजह से हाथ-पैर काम नहीं कर रहे हैं। डॉक्टरों ने महिला को बिलासपुर या रायपुर ले जाने की सलाह दी। उसके परिजनों ने आिर्थक स्थिति कमजोर होने पर शकुंतला को ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे। यहां आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शतदल नाथ व उनकी टीम ने आपरेशन की सलाह दी। जिससे उनका परिवार भी तैयार हो गया। डॉ. नाथ ने आपरेशन शुरू किया।

सफल आपरेशन के बाद सबके चेहरे पर चमक आ गई। अब उसके हाथ और पैर काम करने लगे हैं। इसे डॉक्टर भी चमत्कार बता रहे हैं। शकुंतला के गर्दन की जहां से हड्‌डी खिसक गई थी उसे यथास्थान लाने डॉ.नाथ व उनकी टीम ने आपरेशन किया। टाइटेनियम प्लेट के माध्यम से हडि्डयों को लेबल में लाया गया। उसके बाद शकुंतला के शरीर में धीरे धीरे में हरकत होनी शुरू हो गई है। शकुंतला न केवल सांसें ले रही हैं वरन उसके हाथ व पैर मेें पहले की तरह हरकत होनी शुरू हो गई है। आपरेशन में डॉ.नाथ का सहयोग डॉ.आशीष जायसवाल, एनेस्थिसिया स्पेशलिस्ट डॉ.संध्या, आेटी टेक्नीशियन मो. इदरीस कुरैशी, विकास सदावर्ती व किशोर साहू ने सहयोग किया।

जिले में पहला केस
डॉ.शतदल नाथ ने बताया कि जिले में इस तरह का यह पहला केस है। अब तक जहां ऐसी केसों में लोग बिलासपुर या रायपुर में महंगे खर्च पर समाधान पा रहे थे, लेकिन अब अपने शहर में यह सुविधा मिल रही है। डॉ.नाथ ने बताया कि प्रत्येक मनुष्य के गर्दन में सात हडि्डयां होती हैं, जो शरीर के किसी भी भाग को संचालित करती हैं। ये स्पाइन कार्ड (रीढ़) सिर से लेकर कमर तक खड़े रहने व बैठने की ताकत देती हैं।

नस दबने से काम नहीं कर रहे थे हाथ पैर
मस्तिष्क से निकली नसें ताकत देने में सहायक होती हैं। शकुंतला के मामले में गर्दन की सी-4 व सी-5 हड्‌डी ने रीढ़ को जाम कर दिया और बीच से गुजरी नस दब गई। जिसके कारण दोनों हाथ व पैर में मूवमेंट होना बंद हो गया। जिसे सर्वाइकल स्पाइन कहते हैं। आपरेशन के माध्यम से टाइटेनियम प्लेट लगाकर हड्‌डी को लेबल पर लाया गया।

शकुंतला का स्वास्थ्य परीक्षण करते डॉ. शतदल नाथ।

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