इलाज कराने जाते हैं 80 किलोमीटर दूर
राज्यकर्मचारी बीमा निगम में जिन कर्मचारियों का बीमा है उनका इलाज आसानी से नहीं हो पाता। सामान्य बीमारियों का प्रायमरी ट्रीटमेंट तो चांपा में हो जाता है, लेकिन गंभीर बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए यहां व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को यहां से 80 किमी दूर बिलासपुर का चक्कर लगाना पड़ता है। दस्तावेजों की फार्मेलिटी और आवाजाही में ही मरीज का मर्ज बढ़ जाता है। विकसित हो रहे जिले में भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की दरकार है, लेकिन इस ओर सरकार तो छोडि़ए निजी अस्पताल संचालित करने वालों द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सरकारी, अर्धशासकीय, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों, पावर प्लांटों में कार्यरत कर्मचारियों उनके परिवार के किसी भी सदस्य के बीमार पड़ने पर उनके इलाज के लिए संबंधित प्रतिष्ठान द्वारा कर्मचारी सहित उनके परिवार का बीमा किया जाता है। इसके एवज में प्रति माह कर्मचारी की तनख्वाह से एक निश्चित रकम भी काटी जाती है। बीमित कर्मचारी राज्य कर्मचारी बीमा निगम के अस्पताल में कैश लेस इलाज करा सकते हैं। इस समय चांपा और अकलतरा में ही यह अस्पताल संचालित है, यहां मरीजों की जांच प्रायमरी इलाज की सुविधा है। इन दोनों अस्पतालों में रोज ही सैकड़ों लोग इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। जिले में बड़ी संख्या में औद्योगिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं। उनके कर्मचारियों का इलाज भी ईएसआईसी के माध्यम से होता है। स्थानीय अस्पताल में अच्छी सुविधा होने के कारण यहां के डॉक्टर बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए बिलासपुर या फिर मरीजों की स्थिति देखते हुए रायपुर रेफर करते हैं। अन्यत्र रेफर करने पर मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि बिलासपुर के जिन अस्पतालों से ईएसआईसी का टाई अप है वह जांजगीर से कम से कम 80 किमी दूर है। चांपा अस्पताल से ही कम से कम दस मरीज रोज ही रेफर होते हैं। बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों को सुपर स्पेशलिटीज अस्पताल खोलने के लिए प्रयास करना चाहिए।
चांपा के आेपीडी में पंजीयन कराने लगी भीड़।
दस्तावेजों की फार्मेलिटी भी बहुत
इसस्कीम से कैशलेस इलाज तो होता है लेकिन अस्पतालों में दस्तावेजों की जो फार्मेलिटी मांगी जाती है उससे कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रेफरल फार्म के साथ कर्मचारी का बीमा फार्म के अलावा हितलाभ प्रमाण पत्र, पे स्लीप, ईएसआईसी फार्म 37, आश्रित प्रमाण पत्र