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डीजल-पेट्रोल सस्ता, सफर फिर भी महंगा

7 वर्ष पहले
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केंद्रसरकार ने पिछले छह छह में डीजल के दाम दो बार घटाए लेकिन बस और अन्य वाहनों में भाड़ा एक बार भी नहीं घटाया। इस बार तो सरकार ने 1 नवंबर को डीजल के दाम सीधे छह रुपए 20 पैसे घटा दिए पर भाड़ा एक रुपया भी नहीं घटाया। फ्यूल का रेट बढ़ने पर किराया बढ़ाने के लिए प्रदर्शन करने वालों ने इस पर एक बार चर्चा तक नहीं की। जिम्मेदार भी मूकदर्शक बने यह सब देख रहे हैं।

केंद्र सरकार लगभग हर 15 दिन में पेट्रोल और डीजल के भाव गिरा रही है। डीजल का रेट छह माह पहले 65.01 रुपए था, उससे भी घटाकर वह रेट 59.05 रुपए हो चुका है। इससे ट्रांसपोर्टिंग व्यवसाय से जुड़े सभी व्यवसायियों को लाभ हो रहा है। जांजगीर-चांपा के बीच चलने वाले करीब एक हजार ऑटो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अहम साधन हैं। लोग इसी के सहारे हैं। लगभग लाख भर लोग रोज ऑटो में यात्रा करते हैं। लेेकिन जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने से आम लोगों की जेब ढीली हो रही है। कई लोग ऐसे है जो हर रोज चांपा से जांजगीर या जांजगीर चांपा जाते हैं। लेकिन उनको भी चूना लगाने में आटो या बस वाले चूक नहीं रहे हैं। सालभर से आटो में जांजगीर से चांपा का किराया 15 रूपए और बसों में 10 रुपए है। अब इस धंधे से जुड़े लोग कह रहे हैं कि बस का किराया कम करना या बढ़ाना यह रायपुर मंत्रालय का काम है। बस आपरेटर संघ के मन्ना सिंह का कहना है कि किराया भाड़ा के लिए स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता। मंत्रालय से जो रेट तय होता है उसी के हिसाब से हम संचालन करते हैं।

बसों का किराया भी नहीं हुआ कम।

ट्रांसपोर्टेशन हुआ महंगा

सामानट्रांसपोर्टेशन का भी यही हाल है। डीजल के दाम में वृद्धि होने के साथ ही ट्रांसपोर्टरों द्वारा भी भाड़ा बढ़ा दिया गया था। हर बार डीजल दाम वृद्धि के बाद किराया बढ़ा तो दिया जाता है लेकिन इसके बाद दाम घटते ही किराया कम भी किया जाना चाहिए पर ऐसा ट्रक वाले नहीं करते है।

ऐसे घटे रेट

िदनांक पेट्रोल डीजल

1जुलाई 76.02 ---

1 अगस्त 74.88 65.01

31 अगस्त 70.72 5.64

19 अक्टूबर 68.75 61.85

1 नवंबर 66.27 59.38

( ये दाम शहर में इंडियन आइल कंपनी के हैं, अन्य कंपनियों के डीजल के दामों में केवल कुछ पैसों का अंतर है।)

क्या कहते हैं नागरिक

चंदनियापारा निवासी रामेश्वर तिवारी ने कहा कि जब डीजल के दाम बढ़ते हैं तो ऑटो चालक भाड़ा देते हैं, ल