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बेमौसम बारिश से तापमान में आई छह डिग्री सेल्सियस की गिरावट

6 वर्ष पहले
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शिवरीनारायण मेले पर असर, शादी ब्याह में भी डाला खलल

भास्करन्यूज | जांजगीर

गुरुवारकी सुबह मौसम के एकाएक परिवर्तन हुआ। सुबह से ही घनघोर बदली छा गई, मौसम के बदलते इन तेवरों से लोगों को बारिश का अंदेशा होने लगा था और यही हुआ। सुबह 9 बजे पहले रिमझिम फिर झमाझम बारिश होनेे लगी। करीब एक घंटे तक बूंदा बांदी होती रही। उसके बाद पूरे दिन बादल छाए रहे, जिससे माैसम में ठंडकता घुल गई। शहर सहित जिलेभर में कभी रिमझिम तो कभी झमाझम बारिश का नजारा देखने को मिला। बेमौसम हुई बारिश ने लोगों को परेशान कर दिया है।

बारिश से किसानों और मार्कफेड के अधिकारियों की मुसिबत बढ़ गई है। सुबह कामकाज के लिए घर से निकलने लोगों को छतरी और रैनकोट का सहारा लेना पड़ा। बारिश के कारण अचाकन ठंड भी बढ़ गई। जिससे लोगों को आलमारी में सुरक्षित रखे शाल, स्वेटर भी निकालने पड़े। बारिश के कारण लोग जरूरी काम के लिए भी बाहर निकलने में कोताही बरत रहे थे। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई और मौसम सर्द रहा। मौसम केंद्र रायपुर से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को जांजगीर- चांपा का अधिकतम तापमान 31 डिग्री रिकार्ड किया गया था जो गुरुवार को 25 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान भी गिरकर 12 डिग्री पहुंच गया।

मार्कफेड ने इस साल साढ़े 59 लाख क्विंटल धान की खरीदी की है। धान की बोरियों को संग्रहण केंद्र जांजगीर के किसान राइस मिल, मुनुंद रोड स्थित मनोहर भांठा, सक्ती, अकलतरा और डभरा में रखा गया है। इन सभी संग्रहण केंद्र में बुधवार की शाम तक 39 लाख क्विंटल धान संग्रहण कर लिया गया था। गुरूवार को सुबह बारिश के बाद दिनभर छाई बदली के कारण मार्कफेड के अधिकारी कैप कव्हर की व्यवस्था में लग गए थे। बारिश होने से मार्कफेड ने आनन-फानन में बोरियों को कैप कव्हर से ढ़ंका गया। इसके अलावा जिले के सभी कई खरीदी केंद्रों में भी खुले आसमान में 10 लाखों क्विंटल धान जाम पड़ा है, इसे ढंकने खरीदी प्रभारियों के पास व्यवस्था नहीं है। डीएमओ केपी कर्ष का कहना है वर्तमान में 70 से 80 प्रतिशत धान को ढंकने कैप कव्हर की व्यवस्था है। बाकी धान को ढंकने किसी तरह व्यवस्था बनाई जा रही है। हल्की बारिश से धान को खास प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि धान का छिलका मोटा होता है। श्री कर्ष का कहना है अमूमन जून महीने में कैप कव्हर के लिए कवायद की जाती है। बाकी महीने में चिंता नहीं रहती लेकिन बेमौसम हुई बारिश ने परेशानी बढ़ा दी है।

शादी पर भी खलल

इनदिनों शादी विवाह का दौर चल है। हर समाज में शादी विवाह का मंडप सजा है। मौसम को देखते हुए लोगों ने बारिश से बचाब के कोई इंतजाम नहीं किए थे। रविवार को अचानक झमाझम बारिश होने से शादी की तैयारियों पर भी पानी फिर दिया।



सजे सजाए टेंट भीगकर तर बतर हो गए। घर में मेहमानों की भीड़ होने से कई तरह की परेशानियां हुई।

आगे कैसा रहेगा मौसम

अगलेदो दिन भी कहीं- कहीं बूंदा-बांदी होने की संभावना बनी हुई है। आने वाले एक सप्ताह तक ठंड की स्थिति बनी रहेगी। उत्तरी हवाओं का प्रभाव अधिक होने के कारण न्यूनतम तापमान गिर सकता है, जिसके कारण सुबह और शाम को ठंड की स्थिति बनी रहेगी।

जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव मेले का मजा किरकिरा

इनदिनों जिला मुख्यालय में जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव चल रहा है। जिसमें कई प्रकार झूले सहित किसानों के लिए कई प्रकार के यंत्र मेला में आए हुए हैं। इसके अलावा शिवरीनारायण का माघी मेला शबाब पर है। हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु मेले का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। गुरूवार को मेले में काफी भीड़ बढऩे की संभावना थी, लेकिन मौसम ने सबके उम्मीद पर पानी फेर दिया। बारिश के कारण मेले का आनंद लेना तो दूर वे खरीददारी भी नहीं कर पाए। मेला कीचड़ से सराबोर हो चुका है, जिसमें घूमना लोगों के लिए परेशानियों से भरा रहा। बारिश में व्यवसायी भी मायूस दिखाई दिए।

बेमौसम बारिश ने किसानों की बढ़ा दी चिंता

बेमौसमबारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। रबी फसल में लगे तिवरा, अलसी, अरहल एवं अन्य फसल में इल्ली बढऩे के खतरे से किसान चिंतित दिखाई दिए। जिले भर में एक लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में तिवरा अलसी सहित विभिन्न किस्म की दलहन- तिलहन फसल ली गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक-दो दिन की बारिश से कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। आने वाले समय में बारिश नहीं थमने पर फसल को नुकसान हो सकता है।

इसलिए हुई बारिश

मौसमविशेषज्ञ गोपाल राव ने बताया इन दिनों पूरे प्रदेश में एकतरफ जहां उत्तरी हवा का प्रभाव है तो निचली हवा में दक्षिणी हवाएं चल रही हैं। जिसके कारण बादल छाए हुए है और बारिश की स्थिति बनी हुई है।

आधा अधूरा ढंका कैप कव्हर