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साल भर में कस्टम मिलर्स ने नहीं दिया सरकारी धान का चावल

7 वर्ष पहले
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प्रशासन का दबाव नहीं रहा काम।

भास्करन्यूज | जांजगीर

राइसमिलर्स ने कस्टम मिलिंग करने के लिए सरकार से धान तो ले लिया बदले में बैंक गारंटी, टीडीआर, पीडीसी सब दिया लेकिन चावल देने की बारी आई तो समय पर चावल जमा नहीं किया। वर्ष 2013-14 में उठाए गए धान का चावल अभी तक जिले के 16 राइस मिलर्स ने जमा नहीं किया है।

92 हजार 973 क्विंटल चावल अभी भी मार्कफेड को मिलर्स से लेना है। धान के मूल्य के हिसाब से इतने चावल की कीमत साढ़े चौदह करोड़ रुपए के लगभग है। समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान की कस्टम मिलिंग सरकार द्वारा जिले के पंजीकृत राइस मिलर्स से कराई जाती है। वर्ष 2013-14 में 77 लाख क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। इस वर्ष 155 राइस मिलर्स ने कस्टम मिलिंग करने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। धान का उठाव करने के लिए सरकार द्वारा मिलर्स को बैंक गारंटी में शिथिलता देने के कारण मिलर्स ने धान का उठाव तो कर लिया पर समय पर कस्टम मिलिंग का चावल जमा नहीं किया। 26 फरवरी तक की स्थिति में जिले के 23 राइस मिलर्स के पास 92 हजार 973 क्विंटल चावल अभी भी जाम है।

इनमें 16 मिलर्स ऐसे हैं, जिनसे एक हजार क्विंटल से 15 हजार क्विंटल चावल लेना है। इन राइस मिलर्स को चावल जमा करने के लिए तीन बार मौका दिया जा चुका है, लगातार अल्टीमेटम के बाद भी मिलर्स चावल जमा करने के लिए गंभीर नहीं हैं, 28 फरवरी चावल जमा करने के लिए अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। मिलों में जाम चावल का मूल्य धान के भाव के हिसाब से 14 करोड़ 41 लाख 8305 रुपए होते हैं।

परीक्षण के लिए भेजा नमूना

वर्ष2012-13 में खरीदे गए धान का अभी भी उठाव नहीं हो पाया है। बोड़ासागर संग्रहण केंद्र में 22 सौ मिट्रिक टन धान अभी भी जाम है। यह धान खराब हो गया है। इस धान का क्या उपयोग किया जा सकता है इसका परीक्षण कराने के लिए 26 फरवरी को धान का सैंपल बिलासपुर लैब परीक्षण के लिए भेजा गया।

फिर भी दे रहे धान

सालभर पहले उठाए धान का चावल जिन मिलर्स ने नहीं दिया है, उनसे चावल की रिकवरी करने के बजाय मार्कफेड खाद्य विभाग के द्वारा फिर से उन्हीं राइस मिलर्स को इस बार कस्टम मिलिंग के लिए धान दे दिया गया है। इस संबंध में उनका तर्क है कि मिलर्स की संख्या कम होने के कारण समय पर मिलिंग कराने की मजबूरी है।

कार्रवाई नहीं होने के कारण बरत रहे लापरवाही

कस्टममिलर्स को चावल जमा करने के लिए खाद्य विभाग द्वारा लगातार मौका दिया जा रहा है। हर बार केवल चेतावनी दी जाती है कि समय पर चावल जमा नहीं किया तो मिल को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा, लेकिन पिछले तीन वर्षों में अभी तक किसी भी राइस मिलर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यही वजह है कि मिलर्स समय पर चावल जमा करने में आना कानी करते रहते हैं, इस माह के पहले सप्ताह में भी चावल जमा नहीं करने वाले 26 मिलर्स को चेतावनी दी गई थी।



पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

किस मिलर्स से कितना चावल बाकी

{ओमसाई चावल उद्योग 15649.57

{ श्री मनोहर राइस मिल 11823.47

{ श्री नारायणी राइस मिल 11397.64

{ जय मां अन्नपूर्णा राइस मिल 8227.85

{ गुरू राइस प्रोडक्ट 7373.33

{ श्रीराम राइस मिल 6599.17

{ ओंकार एग्रो टेक 4901.81

{ आरके एग्रो इंडस्ट्रीज 4271.80

{ पटेल राइस मिल 4234.56

{ श्री मां बमलेश्वरी राइस मिल 3999.46

{ श्रीकृपा राइस प्रोडक्ट 3241.25

{ मां मनका फूड प्राेडक्ट्स 2870.96

{ शारदा राइसमिल 1668.01

{ भगवती राइस मिल 1491.95

{ ओवल राइस मिल 1189.85

{ बृजलाल बाबूलाल गर्ग 1017.75

(डाटा मार्कफेड के अनुसार 26 फरवरी की स्थिति में)

^23 मिलर्स से कस्टम मिलिंग का चावल बाकी है, 28 फश्रवरी अंतिम तिथि निर्धारित की गई है, नियत समय पर चावल जमा नहीं होने पर मिलर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।\\\'\\\' केपीकर्ष, डीएमओ