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दो माह में पुलिस को नहीं मिली कॉल डिटेल

6 वर्ष पहले
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कलेक्टरके फर्जी हस्ताक्षर से नौ लोगों को जिला योजना एवं सांख्यिकी शाखा में नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले फर्जीवाड़े के आरोपी की बात इस मामले में किन किन लोगों से हुई है, इसकी जानकारी पुलिस को अभी तक नहीं हाे पाई है। पुलिस को दो माह बाद भी कॉल डिटेल रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। कॉल डिटेल नहीं मिलने से पुलिस की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। मामले में जिन लोगों का नाम आरोपी ने बताया है उनकी भूमिका का खुलासा नहीं होने से सस्पेंस बरकरार है।

हालांकि सूत्रों के अनुसार एक रिपोर्ट मिली है जिसमें कथित अधिकारी से आरोपी की बात हुई है, पर पुलिस इस मामले में कुछ भी स्पष्ट कहने से बच रही है।जिला याेजना एवं सांख्यिकी शाखा सहित जनपद पंचायतों में भी कलेक्टर ओपी चौधरी के फर्जी हस्ताक्षर से नौ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया गया था। मामले का खुलासा दैनिक भास्कर ने 16 दिसंबर के अंक में किया था। तब ठगे गए लोगों ने ठग पूनमचंद लहरे को कलेक्टर के सामने खड़ा कर दिया था। पुलिस ने कलेक्टर के निर्देश पर फर्जीवाड़े का मामला दर्ज कर अारोपी को जेल भेज दिया। आरोपी ने अपने बयान में कलेक्टोरेट के दो बड़े अधिकारियों सहित एक बाबू और एक कंप्यूटर आॅपरेटर सहित एक चपरासी के शामिल होने का दावा किया है। आरोपी का कहना है कि उसने दो बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया है। अधिकारियों ने आवेदकों की अंकसूची का सत्यापन से लेकर आदेश तक जारी किया है और पूरा काम उनकी जानकारी में कलेक्टोरेट के ही बाबू और कंप्यूटर ऑपरेटर ने किया है। उसने रायपुर मंत्रालय के एक अनुभाग अधिकारी के भी संलिप्त होने की जानकारी पुलिस को दी है। पुलिस ने आरोपी के बताए फोन नंबरों की कॉल डिटेल निकालना शुरू किया है। सूत्रों के अनुसार रायपुर के जिस कथित अनुभाग अधिकारी का नंबर आरोपी ने पुलिस को दिया है, उस नंबर से आरोपी की बात हुई है यह कॉल डिटेल में गया है। लेकिन इस संबंध में पुलिस कुछ स्पष्ट कहने से बच रही है। आश्चर्य की बात है कि स्थानीय अधिकारियों बाबू तथा कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका की जांच अभी तक पुलिस नहीं कर पाई है और ही कॉल डिटेल रिपोर्ट ही पुलिस को मिल पाई है। पुलिस का कहना है कि जो नंबर आरोपी पूनमचंद ने दिए हैं वे सही नहीं हैं। इस कारण देरी हो रही है।

कैसी हाईटेक पुलिस

जिलेकी पुलिस हाईटेक होने का दावा करती है। सभी थाना प्रभारी दिनभर वाट्सएप पर ऑनलाइन रहते हैं। जिले में मोबाइल कॉल डिटेल निकालने के लिए एक सेल भी है, लेकिन दो माह में सीडीआर नहीं मिलने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस भी इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है। हालांकि इस दौरान नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में भी पुलिस व्यस्त रही। अब जल्दी ही मामले के निराकरण की उम्मीद की जा रही है।

^सभी की भूमिका की जांच की जा रही है, कोई भी इस मामले में संलिप्त पाया गया तो बख्शा नहीं जाएगा। एक सीडीआर आई है, आरोपी ने जो नंबर दिए थे उसमें गलत डिजिट होने के कारण सीडीआर से पता नहीं चल रहा है। रायपुर के किसी अधिकारी से बात हुई है पर वह कौन है यह पुष्ट नहीं हो रही है। और सीडीआर निकाली जा रही है। विजयअग्रवाल, एएसपी