पानी देने में पालिका फेल
नगरपालिकाजांजगीर-नैला की माली हालत गड़बड़ा गई है। नगरवासियों को पानी नहीं दे पाने का खामियाजा पालिका को उठाना पड़ रहा है। जल आवर्धन योजना बंद होने के कारण नगरवासी पानी का टैक्स नहीं दे रहे। जांजगीर नगर में जलापूर्ति के लिए बनाई गई जल आवर्धन योजना पीएचई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही, स्थल चयन में अदूदर्शिता तथा नपा के जनप्रतिनिधियों की किंकर्तव्यविमुढ़ता के कारण सफल नहीं हो पाई। नगर में जल आवर्धन योजना से पानी की सप्लाई लगभग चार सालों से बंद है जिसके कारण टैक्स की वसूली भी नहीं हो पा रही है। पालिका अपने सिस्टम से किसी तरह पानी की सप्लाई कर रही है लेकिन यह काफी नहीं है।
जांजगीर- नैला नपा 25 वार्ड में बंटा है और आबादी 40 हजार है। आधे शहर के लोगों को नपा पानी नहीं पिला पा रही है। हसदेव नदी में फिल्टर प्लांट, पानी टंकी, पाइप लाइन विस्तार इंटकवेल बनाने के लिए 2004 में 4 करोड़ 29 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। वर्ष 2006 में पीएचई ने काम पूरा कर दिया लेकिन कई खामियां होने के कारण नगर पालिका ने हैंड ओवर लेने से मना कर दिया। पीएचई द्वारा चांपा से जल आपूर्ति का सिस्टम पिछले तीन सालों से फेल है। शहरवासियों के पेयजल की आपूर्ति के मद्देनजर कंट्रोल रूम के पीछे 9 लाख लीटर क्षमता की टंकी तो बनवा दी गई लेकिन यह लोगों के लिए किसी काम की नहीं है। पिछले तीन साल से इंटकवेल के जरिए टंकी तक ही पानी नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि पालिका प्रशासन द्वारा अपनी खामियों को दबाने 12 लाख की लागत से यहां सम्पवेल का निर्माण किया गया है। पुरानी टंकी के पास ही नई भूमिगत टंकी बनाई गई है, लेकिन इससे से भी मेन टंकी तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। - शेषपेज 16 पर
ऐसेमें आधे शहर में सप्लाई नहीं हो पा रही है। पालिका अपने बोर और पंप हाउस से पानी सप्लाई कर रही है लेकिन यह आधे वार्ड में ही पहुंच पा रहा है।
जलापूर्ति के बदले में 180 रुपए प्रति माह टैक्स निर्धारित है। नागरिकों से 12 लाख 20 हजार जल कर वसूलना है, लेकिन जल आवर्धन योजना बंद होने के कारण लोग पैसा नहीं दे रहे हैं। यही हाल भागीरथी नल जल योजना का है। इस योजना में हितग्राहियों से 60 रुपए प्रति माह की दर से जल कर लेने का प्रावधान है। पालिका इस सत्र में अब तक मात्र 4 लाख 58 हजार जल कर की वसूली कर पाई है। कर्मचारी जब जल कर की बात करते हैं तो लोगों से उल्टे खरीखोटी सुनती पड़ रही है। यही वजह है कि नगरपालिका के कर्मचारी भी टैक्स वसूलने के काम को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पिछले दस माह में नगर में विभिन्न करों में मात्र 66 लाख 77 हजार रुपए की वसूली हो पाई है, जबकि टारगेट 1 करोड़ 35 लाख 23 हजार का है। नगरपालिका द्वारा संपत्ति कर, समेकित कर, जलकर, बाजार कर दुकान कर की वसूली नागरिकों से की जाती है। प्रति वर्ष मार्च माह के अंतिम दिनों में नए वित्तीय वर्ष के लिए रिकवरी का टारगेट सेट हो जाता है। इस वित्तीय वर्ष के बाकी 51 दिनों में 68 लाख 46 हजार वसूली करने की कठिन चुनौती पालिका के कर्मचारियों के सामने है।
किसी काम की नहीं रही टंकी।
दो माह में वसूले पौने पंद्रह लाख
सीएमओद्वारा टैक्स वसूली के लिए बारह टीमों का गठन किया गया है, लेकिन बताया जाता है कि कुछ लोग ही वसूली करने के लिए निकल रहे हैं। इस कारण अपेक्षित वसूली नहीं हो पा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष के पहले आठ माह में नगरपालिका द्वारा मात्र 25 लाख रुपए की वसूली की गई थी। तब भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा था। अक्टूबर में सीएमओ अरूण शर्मा के ट्रांसफर के बाद आए सीएमओ राजेंद्र कुमार पात्रे ने टैक्स वसूली पालिका के वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए पालिका के कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए वसूली का काम गंभीरता से कराने का निर्देश दिया जिसके बाद दिसंबर में 27 लाख जनवरी मेें 14 लाख 87 हजार सहित रुपए की वसूली हो गई।
^पालिका की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। टैक्स रिकवरी के लिए टीम बनाई गई है। पिछले दो माह में करीब 42 लाख रुपए की वसूली हो पाई है। जलकर पटाने लोगों से आग्रह किया जा रहा है। इसके बाद भी टैक्स जमा नहीं करने वालों के कनेक्शन काटे जाएंगे। ज्यादा से ज्यादा कर वसूली के लिए प्रयास किया जा रहा है। आरकेपात्रे, सीएमओ जांजगीर- नैला
मद डिमांड रिकवरी
संपत्ति कर 31.19 22.38
समेकित कर 68.46 18.60
जलकर 12.20 4.58
बाजारकर 15.80 15.01
दुकान कर 7.58 6.20
कुल 135.23 66.77 (डाटापालिका के अनुसार, राशि लाख में)
टैक्स वसूली नहीं होने के कारण नगरपालिका के कर्मचारियों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिल पाया है। हालांकि टैक्स वसूलने के लिए सीएमओ द्वारा बारह टीमों का गठन किया गया है। लेकिन आधे कर्मचारी पालिका से बाहर ही नहीं निकलते हैं, जबकि कुछ लोग कार्यालयीन कार्यों के अलावा वसूली के लिए भी एड़ी चोटी एक कर रहे हैं। नगरपालिका की माली हालत एक बार फिर बिगड़ने लगी है। स्थिति यह है कि पालिका के कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ गए हैं। पालिका में नियमित कर्मचारियों के 108 पद स्वीकृत हैं, जबकि मात्र 77 कर्मचारी ही पदस्थ हैं। इन नियमित कर्मचारियाें का वेतन भुगतान करने के लिए प्रति माह बारह से पंद्रह लाख रुपए की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि कुछ राशि सरकार द्वारा दी जाती है, लेकिन पिछले कुछ माह से सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि भी नहीं मिल रही है और ही स्थानीय स्तर पर राजस्व की वसूली हो पा रही है। जिसके कारण कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है।