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घंटों लाइन में लगने के बाद मरीजों को मिलता है खाना

7 वर्ष पहले
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जिलाअस्पताल में भर्ती मरीजों को खाने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है। मरीज लंबी लाइन में लगे रहते हैं और भोजन परोसने वाला अपनी मर्जी से खाना देता है। अस्पताल प्रबंधन का इस ओर ध्यान ही नहीं है। ऐसे में मरीज और उनके परिजन हलाकान हो रहे हैं।

शासन की योजना के तहत जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को निशुल्क पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, लेकिन यहां हालत ये है कि भोजन के नाम पर शासन और मरीजों को ठगा जा रहा है। मरीजों की लंबी लाइन लगने के बाद डाइट ठेकेदार के कर्मचारी कहीं चले जाते हैं और मरीज लाइन में लगे रहते हैं। मरीजों की ओर देखने वाला भी जिला चिकित्सालय में कोई नहीं है। खासकर रविवार को ज्यादा परेशानी होती है। रविवार को दोपहर 1.50 बजे जब भास्कर की टीम पहुंची तो नजारा कुछ ऐसा ही था। चावल, दाल और एक सब्जी को लाकर रख दिया गया था। वहां पर मरीजों की लंबी लाइन लग गई थी और खाना देने वाला गायब था। इधर मरीज या उसके परिजन थाली लेकर वहां पर आधा घंटा तक खड़े रहे। भास्कर की टीम ने आसपास देखने के बाद डाक्टर रूम जाकर देखा तो वहां एक डाक्टर श्वेता दास मिलीं। डाक्टर इस संबंध में पूछा कि खाना देने वाला गायब है और वहां मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई है तो डाक्टर ने साफ कह दिया कि डाइट ठेकेदार के बारे में हम कुछ नहीं बता सकते आप कहीं और से पता करो। आधा घंटा बाद दोपहर का खाना 2.25 बजे मरीजों को मिला। मरीजों का कहना था कि रोज का यही हाल है, खाना देने का कोई टाइम नहीं है। इस सबसे अस्पताल प्रबंधन को सरोकार नहीं है।

डॉक्टरों काे सरोकार नहीं

रविवारको डाक्टरों सहित सीएस का फोन भी नहीं लगता है या कभी लग जाता है तो वे रिसीव भी नहीं करते। भास्कर की टीम जब अस्पताल पहुंची तो खाना का टेबल तो लगा हुआ था, उसके सामने मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई थी। मरीज खाना को लेकर आक्रोशित नजर रहे थे और वे बोल रहे थे कि खाना कभी भी सही टाइम में नहीं मिलता है। इस संबंध में जानकारी लेने के लिए जब सीएस डा. व्हीके अग्रवाल के मोबाइल में संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल स्विच आफ मिला, देर शाम तक यहीं हाल था। कुछ देर बाद आरएमओ एससी श्रीवास्तव को लगाया गया तो उनके मोबाइल पर घंटी गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। तीन से चार फोन लगाने के बाद भी फोन रिसीव नहीं किया गया।

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