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साइकिल मैकेनिक का बेटा दिल्ली में दिखाएगा जौहर
नगरमें साइकिल दुकान चलाने वाले साइकिल मैकेनिक गुलाम अंसारी के बेटे नईम अंसारी के बायो डीजल पावर प्लांट मॉडल का चयन राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी के लिए हुआ है। राष्ट्रीय स्पर्धा दिल्ली में अक्टूबर माह के पहले सप्ताह में आयोजित होगी।
प्रतिभाओं की कमी जिले में नहीं है। कहते हैं पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। अकलतरा रोड में संचालित जयभारत इंग्लिश मीडियम स्कूल के कक्षा नवमी के छात्र नईम अंसारी की रुचि बचपन से ही विज्ञान में थी। उसके पिता गुलाम अंसारी ने उसे कुछ नया करने के लिए प्रोत्साहित किया। छोटी सी साइकिल दुकान चलाकर सीबीएसई स्कूल में पढ़ाया। नईम ने जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में बायो डीजल पावर प्लांट का मॉडल बनाया था। उस मॉडल का चयन राज्य स्तरीय स्पर्धा के लिए हुआ। रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय स्पर्धा रायपुर में उसने शिरकत की। वहां भी नईम के मॉडल को सराहा गया और उस माॅडल का चयन राष्ट्रीय स्पर्धा के लिए किया गया है। नईम ने बताया कि बिजली कोयला और भूसे से उत्पन्न की जाती है। इससे महंगी बिजली मिलती है। एक यूनिट बिजली के लिए 4 से 5 रुपए की लागत आती है। जबकि भूसे और रतनजोत से बिजली उत्पन्न करने पर लागत 50 पैसे से 1 रुपए प्रति यूनिट तक आएगी। साथ ही रतनजोत से निकले तेल से डीजल गाडिय़ां जनरेटर चलाया जा सकता है। उसने बताया कि बायो डीजल प्लांट को स्थापित करने में भूसा प्लांट से कम लागत आएगी और जगह भी कम लगेगी। इसके अलावा भूसा और कोयला से बिजली पैदा करने में धुंआ ज्यादा निकलता है जबकि बॉयोडीजल प्लांट से प्रदूषण कम होगा।
नईम ने अपना मॉडल घर के अनुपयोगी सामग्रियों से बनाया है। उसने मॉडल को बनाने के लिए प्लास्टिक जार, पीवीसी पाइप, पानी साइकिलों के स्पोक, कॉपर वायर, पुराना प्लाईवुड, बच्चों के खेलने के पुराने मोटर का उपयोग किया है।
नईम के अनुसार भूसे और रतनजोत के बीज को एक साथ मिलाकर बॉयलर में उबाला जाएगा। इससे भाप निकलेगी भाप का प्रेशर प्लांट में लगे टरबाइन को प्रेशर के साथ घुमाएगा। दबाव बढ़ने पर टरबाइन जनरेटर को तेज गति से घुमाएगा। तेज गति से दोनों के घूमने पर बिजली पैदा होगी।
वेस्टेज मटेरियल से बनाया मॉडल
कैसे काम करेगा प्लांट