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10 दिन में हुए दस हादसों में दस की गई जान
जिलेकी सड़के साल के अंतिम महीने की शुरुआती पखवाड़ा हादसों के नाम रहा। पिछले दस दिनों से लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। इन हादसों में दस लोगों की मौत हो चुकी है,वहीं आधा दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है।
सड़कों पर वाहनों से फर्राटे भरने वाले अधिकांश लोग यह सोचकर वाहन चलाते हैं कि सामने वाला सतर्क होकर वाहन चलाएगा ताकि दुर्घटना हो सके। इसी सोच के कारण लापरवाही पूर्वक वाहनों का संचालन होता है और दुर्घटनाएं हो जाती है। एमवीए एक्ट में बड़े वाहन चालक को ही दोषी मानने का प्रावधान होने के कारण पुलिस भी उसी के खिलाफ मामला दर्ज करती है, पर अधिकांश मामलों में बाइक सहित अन्य छोटे वाहन चलाने वालों का दोष है। युवा वर्ग फास्ट पिक अप वाली बाइक में कट मारते हुए फर्राटे भरते हैं, जिसके कारण जान जाती है। पिछले दस दिनों में ही जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में दस सड़क हादसे हो चुके हैं। इन दस हादसों में दस लोगों की जान असमय चली गई है।
जागरूकता का अभाव
लोगोंका ट्रैफिक सेंस की जानकारी देने के लिए लगातार यातायात शाखा द्वारा अभियान चलाया जाता है। लोगों को बिना लायसेंस वाहन चलाने, हेलमेट नहीं पहनने, पूरा दस्तावेज नहीं रखने के अलावा ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करने पर समय समय पर चेतावनी दी जाती है तथा पेनाल्टी भी लगाई जाती है। इसके बाद भी लोग यातायात के नियमों से बेपरवाह वाहन चलाते हैं। लाख प्रयास के बाद भी लोग बाइक चलाते समय हेलमेट का उपयोग नहीं करते। जिसके कारण हादसें में सिर को चोट लगती है जान जाने की आशंका बनी रहती है।
जांजगीर डेंजर जोन में दो हादसे
जांजगीरपहुंचने के रास्ते बनारी रोड में इस सप्ताह दो हादसे हुए। पुटपुरा मोड़ के पास 2 दिसंबर को दो भारी वाहन भीड़ गए जिसमें जबलपुर के एक ट्रक चालक की मौत हो गई। वहीं 9 दिसंबर को शारदा चौक में ट्रेलर कैप्सूल की भिड़ंत में कैप्सूल चालक स्टेयरिंग में ही फंस गया जिससे उसकी मौत हो गई। केरा रोड, बनारी रोड चांपा रोड में पिछले तेरह वर्षों में छह सौ से अधिक सड़क हादसे हुए हैं। इन हादसों में 94 मुसाफिर भारी वाहनों की चपेट में आकर कालकवलित हुए हैं तो 514 यात्री घायल हुए हैं। जिले के बाइस डेंजर जोन में हुए हादसों की तुलना में जांजगीर एप्रोच रोड की दुर्घटनाएं पूरे जिलें में हुए हादसे का पचास प्रतिशत है।
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