16 नाबालिगों का पता नहीं लगा पाई पुलिस
सीधी बात| विजयअग्रवाल, एएसपी
सुप्रीमकोर्ट की सख्ती के बाद जिले की पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर 61 किशोर किशोरियों की तलाश तो कर ली पर बचे 16 का सुराग नहीं मिल पा रहा है। इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि लापता लोगों के पालकोें द्वारा सही सूचना पुलिस को नहीं दी जा रही है। इन लापता 16 नाबालिगों की तलाश में पुलिस अब अन्य लोगों का सहयोग चाहने लगी है। इसके लिए एसपी ने पुख्ता जानकारी देने वालों को इनाम देने की भी घोषणा कर दी है।
जनवरी 2011 से मई 2014 के बीच जिले के विभिन्न स्थानों से 61 किशोरी और 16 किशोर सहित 72 नाबालिग अपने घर की चारदीवारी छोड़कर भाग गए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नाबालिगों के लापता होने पर पुलिस ने सीधा अपहरण का मामला दर्ज किया था। बचपन बचाओ अभियान के तहत इन लापता नाबालिगों की सुध सुप्रीम कोर्ट ने ली और सख्त तेवर अपनाते हुए 5 दिसंबर तक सभी को दस्तयाब करने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने इसके लिए दर्जन भर से ज्यादा टीम बनाई और देश के विभिन्न प्रांतों से वर्षों से लापता किशोर किशोरियों को ढूंढ भी निकाला। इस दौरान 61 नाबालिगों को बरामद किया गया। 10 लड़कियां 6 लड़के अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। इनकी पक्की सूचना देने वालों को 5-5 हजार रुपए बतौर इनाम देने की घोषणा एसपी प्रशांत अग्रवाल ने की है।
प्रेम संबंध स्वीकारा और छूट गए
किशोरियोंके अपहरण के बाद दस्तयाब होने पर पुलिस ने करीब दस मामलों में किशोरी के बयान के आधार पर दुष्कर्म का मामला भी दर्ज किया। लेकिन इन मामलों में युवतियों ने कोर्ट के सामने पेश होकर प्रेम संबंध स्वीकार लिया तो अधिकांश मामलों में वे छूट भी गए। वहीं कई मामलों में पुलिस ने 164 के तहत कथन लेकर छोड़ दिया।
सभी क्षेत्र से हुए गायब
नाबालिगोंके लापता होने का कोई विशेष एरिया जिले में चिन्हांकित नहीं है। सभी ब्लॉक और विभिन्न क्षेत्रों से नाबालिग पलायन कर गए हैं। पर अधिकांश लोग कमजोर आर्थिक स्थिति वर्ग से हैं। इसमें कुछ ऐेसे लोग भी हैं, जिनके माता पिता कमाने गए और वहीं से वे भाग गए। पालक जब वापस लौटे तो जिले में रिपोर्ट दर्ज कराई।
तस्करी नहीं प्रेम प्रसंग का मामला
पुलिसको जिले में एक भी मामला मानव तस्करी का नहीं मिला। अधिकांश मामलों में दस्तयाबी के दौरान गायब किशोर किशोरियों ने किसी किसी के साथ विवाह कर लिया है। ऐसे कई जोड़े पुलि