सुको का आदेश दरकिनार, फर्राटे भर रहे ओवरलोड बाराती वाहन
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा
शादी सीजन में सड़कों पर बिना परमिट के बाराती वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। सवारी वाहनों समेत ट्रक, ट्रैक्टर व अन्य मालवाहक का उपयोग कर यातायात नियमों का खुलेआम मखौल उड़ाया जा रहा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट दिसंबर माह में बढ़ते सड़क हादसे को देखते हुए ओवरलोड वाहन सहित 7 बिंदुओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद परिवहन विभाग द्वारा किसी तरह कार्रवाई नहीं किए जाने से यह नजारा आम है। इसके अलावा बिना परमिट बाराती वाहन सड़कों में खुलेआम दौड़ रहे हैं। जिससे शासन को हर साल लाखों का चूना लग रहा है।
सड़क हादसों की लगातार बढ़ती संख्या पर कोर्ट ने चिंता जताते हुए सात बिंदुओं की गाइड लाइन दिसंबर माह में जारी की है। खास बात यह है कि कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद ही इसे लेकर छत्तीसगढ़ शासन ने भी आदेश जारी कर दिए। यह आदेश पुलिस के अलावा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी तक भी पहुंच गया। जिसमें मालवाहक वाहनों में सवारी नहीं ढोना सहित 7 बिंदुओं पर गाइडलाइन जारी किया गया था। इस आदेश को अब तक का सबसे सख्त आदेश बताया जा रहा था। आदेश में मालवाहक वाहन में ओवरलोड या सवारी पाए जाने की स्थिति में लाइसेंस निरस्त करने की बात कही गई थी। लेकिन अभी शादी सीजन में सारे नियम कायदो का का मखौल उड़ता नजर आ रहा है। बारातियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए ऐसे वाहन मालिकों द्वारा लोगों से मनमाने रकम तो वसूले ही जा रहे हैं लेकिन विभाग से कार्रवाई करने व लाइसेंस निरस्त करने में परमिशन लेने में कोताही बरत रहे हैं। अब तक न तो परिवहन विभाग या यातायात विभाग द्वारा एक भी मालवाहक वाहन पर कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि जिला मुख्यालय में ही कोई भी चौक में पांच मिनट खड़े हो जाने से कई मालवाहक वाहन में ओवरलोड सवारी ढोते आसानी से देखे जा सकता है। जिले में परिवहन विभाग व यातायात विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेश मखौल उड़ाया जा रहा है। जिसके कारण ऐसे मालवाहक वाहनों के मालिकों का हौसला बुलंद हो गया है और वे धड़ल्ले से सड़कों में सवारी ढोकर परिवहन विभाग व यातायात पुलिस को ठेंगा दिखा रहे हैं।
शहर के ही चांपा रोड से निकल रहे सवारी से भरी मालवाहक वाहन
यातायात विभाग को चेेकिंग कर कार्रवाई करने कहा गया था। उनके द्वारा ऐसे वाहनों की चेकिंग कर कार्रवाई की जा रही है। व्यस्तता के कारण परिवहन विभाग द्वारा कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकी थी। अब फ्लाइंग क्वायड की टीम बनाकर लगातार ऐसे मालवाहक वाहनों पर कार्रवाई करेंगे। दुबारा पकड़ने जाने की स्थिति में लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी। सुखनाथ अहिरवार, प्रभारी आरटीओ
इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
आजकल लगातार हो रहे सड़क हादसे का प्रमुख कारण शराब पीकर, मोबाइल से बात करते वाहन चलाना, मालवाहक पिकअप , छोटा हाथी सहित अन्य पर यात्री ढोने के लिए किया जाता है। ये वाहन केवल माल ढोने के लिए ही उपयोग करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं करते आए दिन मालवाहक वाहनों में ऐसा नजारा देखने को मिलता है। शादी सीजन में तो ग्रामीण क्षेत्रों मालवाहक वाहन से ही ओवरलोड यात्री ढोने का काम चलता है। जिससे आए दिन हादसे होते रहते है। इसके अलावा हादसे में ज्यादातर हेलमेट का उपयोग नहीं करना, ओवरस्पीड गाड़ी चलाना व रेड लाइट पार भी शामिल है।
अस्थाई परमिट जारी कराने लोगों की रुचि कम
तय किया है शुल्क- परिवहन विभाग ने बकायदा अस्थाई परमिट के लिए 300 रुपए का शुल्क निर्धारित किया है। हालांकि इसमें भी क्षमता व सीट के हिसाब से शुल्क लिए जाते हैं। साथ ही प्रति किलोमीटर की दर से अलग से 50 पैसे के हिसाब से शुल्क अलग से जमा कराया जाता है। लेकिन किसी शादी सीजन में वाहन वाले परमिट लेने में कोताही बरतते हैं। चेकिंग के दौरान पकड़े जाने पर जुर्माना देकर छूट जाते है तो वे लोग भी परमिट लेने में ध्यान नहीं देते। इससे विभाग को भी लाखों का चूना लग रहा है।
क्यों नहीं लेते परमिट- बाराती ढो रहे वाहनों पर कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। चेकिंग के दौरान विभाग द्वारा जुर्माना वसूली तो की जाती है लेकिन कार्रवाई करने में कोताही बरती जाती है। कई बार जुर्माना का पैसा बारात ले जाने वाले को देना पड़ता है क्योंकि यह सौदा वाहन मालिक व बाराती ले जाने वाले के बीच पहले से तय हो गया रहता है। बारात ले जाना शादी घर वालों के लिए जरूरी रहता है इसलिए वे ही मजबूर होते हैं।। ऐसे में चेकिंग के दौरान पकड़े जाने पर वाहन मालिक को कोई नुकसान नहीं होता।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर शासन से निर्देश
मालवाहकों का उपयोग यात्री ढोने के लिए किए जाने पर।
रेड लाइट जंपिंग करने पर।
ओवर स्पीड गाड़ी चलाने पर।
मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने पर।
नशे की हालत पर वाहन चलाने पर।
हैलमेट का उपयोग नहीं करने पर।
ओवर लोड वाहन चलाए जाने पर।