पेनकार्ड नियम के विरोध में बंद रही सराफा की दुकानें
विरोध में सराफा बाजार रहा पूर्णत: बंद
केंद्र सरकार के निर्णय का सराफा व्यवसायियों ने किया विरोध।
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा
दो लाख रुपए से अधिक की ज्वेलरी खरीदी पर पेन कार्ड अनिवार्य करने के विरोध में बुधवार को देशव्यापी बंद का आह्वान सराफा व्यवसायियों द्वारा किया गया। इसके समर्थन में जिले में भी सराफा दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। सराफा व्यवसायियों ने कहीं धरना प्रदर्शन नहीं किया और न ही ज्ञापन सौंपा, लेकिन दुकानें बंद कर विरोध दर्ज कराया। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश संगठन का जो निर्णय होगा उसका अागे भी पालन किया जाएगा।
सोने चांदी के व्यवसाय में टैक्स चोरी की संभावना को देखते हुए केंद्र सरकार ने लगभग साल भर पहले बजट में यह प्रावधान किया था कि एक समय में दो लाख से अधिक की ज्वेलरी वही खरीद सकता है जिसके पास आयकर विभाग द्वारा जारी किया गया पेन कार्ड हो। बाद में केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव पर अमल नहीं किया, इसकी अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण यह नियम नहीं बन पाया। एक बार फिर केंद्र सरकार इसे अमल में लाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार के इस निर्णय के विरोध में देश भर के सराफा व्यवसायियों ने बुधवार को देशव्यापी बंद का आह्वान किया था। छग सराफा संघ के निर्देश पर जिले के सराफा व्यवसायियों ने अपने प्रतिष्ठान बंंद रखे। जिला मुख्यालय जांजगीर, चांपा, बलौदा, अकलतरा, शिवरीनारायण, सक्ती, बाराद्वार, खरौद, राहौद सहित जिले की लगभग साढ़े तीन सौ दुकानों के शटर दिन भर नहीं खुले। सराफा संघ चांपा के नारायण सोनी और विजय सोनी ने बताया कि पैनकार्ड अनिवार्य करने पर जरूर सराफा व्यवसाय प्रभावित होगा। उनका कहना है कि अन्य व्यवसायों में जब पैनकार्ड की बाध्यता नहीं है तो केवल ज्वेलरी व्यसायियों के लिए इसे अनिवार्य क्यों किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार के निर्णय के विरोध में दुकानें बंद रहीं आगे प्रदेश सराफा संघ का जो निर्णय होगा उसके अनुसार कार्य किया जाएगा। आम लोगों को सराफा व्यवसायियों की हड़ताल से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा क्योंकि अब शादी विवाह का सीजन भी समाप्त हो गया है फिर भी इससे जिले में करीब एक करोड़ के व्यवसाय प्रभावित होने का दावा ज्वेलर्स कर रहे हैं।
पेन कार्ड की अनिवार्यता के विरोध में दुकान बंदकर धरना में बैठे सराफा व्यवसायी
क्या होगा नुकसान
जिले में दो लाख से अधिक की ज्वेलरी एक व्यक्ति द्वारा खरीदी की जाती हो ऐसा तो कम ही होता होगा। लेकिन पेन कार्ड की अनिवार्यता से बड़े व्यापारियों को सबसे अधिक नुकसान होगा। लोगों को जागरूक करने, सामान खरीदते समय पक्की रसीद लेने के नियम भले ही बनाए गए हों लेकिन आज भी पढ़ा लिखा ग्राहक तक पक्की रसीद लेने में रूचि नहीं दिखाता। इसकी वजह से संस्थानों में आयकर की चोरी होती है। वैसे भी सरकार ने ढाई लाख के इनकम को टैक्स के दायरे से छूट दी है, फिर भी यदि दो लाख की खरीदी पर पैनकार्ड अनिवार्य होगा तो ज्वेलर्स को इन सबका हिसाब रखना पड़ेगा और धंधा एक नंबर का होने पर आय को छुपाया नहीं जा सकेगा।
विरोध की एक वजह यह भी मानी जा रही है।
क्यों कर रहे विरोध
सराफा व्यवसायियों का कहना है कि जब हार्डवेयर, छड़, सीमेंट, वाहन खरीदी सहित किसी अन्य व्यवसाय में दो लाख से अधिक की खरीदी पर पेन कार्ड की बाध्यता नहीं है तो केवल सराफा व्यवसाय में इसे लागू करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि अधिकांश लोगों के पास पैन कार्ड नहीं होता है। हालांकि जिले में दो लाख की एकमुश्त खरीदी करने वाले गिने चुने लोग ही होंगे। लेकिन शादी के सिजन में बड़ी राशि की खरीदी जरूर होती है। एक तर्क यह भी है कि यह जरूरी नहीं कि जो पैन कार्ड का नंबर खरीदार दे रहा है वह सही हो इसलिए उसका रिकॉर्ड भी रखना पड़ेगा। इन वजहों से सराफा व्यवसायी सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं।