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उफ.... ये जाम! एक घंटे में छह बार बंद हुआ रेलवे का फाटक

5 वर्ष पहले
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ओबी

निर्माण में

देरी से बढ़ी

परेशानी
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

जांजगीर-चांपा रोड में यात्रा करना इन दिनों किसी मुसीबत से कम नहीं, किसी को जल्दी अपने गंतव्य तक पहुंचना है तो भूल जाइए कि वह समय पर पहुंच पाएगा, इस रोड में औसतन हर आठ से दस मिनट में रेलवे का फाटक बंद हो जाता है। बुधवार की दोपहर ढ़ाई से साढ़े तीन बजे के बीच छह बार फाटक बंद हुआ और हर बार वाहनों की लंबी लाइन दोनों ओर लग गई।

दोपहर ढ़ाई बजे एक मालगाड़ी जांजगीर से चांपा की ओर गुजरी तो फाटक बंद किया गया, इसके लगभग पांच मिनट बाद चांपा की ओर से मालगाड़ी निकली फिर फाटक बंद कर दिया गया, कुछ देर बाद जांजगीर की ओर से फिर एक मालगाड़ी गुजरने पर फाटक बंद कर दिया गया, करीब दस मिनट बाद जांजगीर की ओर से फिर एक एक्सप्रेस ट्रेन निकलने पर फाटक बंद कर हुआ। करीब साढ़े तीन बजे लगातार दोनों ओर से एक एक यात्री गाड़ी व एक एक मालगाड़ी गुजरने से सड़क यातायात बाधित हुआ। इस दौरान बार-बार दोनों ओर वाहनों का जाम लगता रहा। फाटक खुलते ही लोगाें को वाहनों की भीड़ से होते हुए निकलने में समय लगा। जांजगीर और चांपा के बीच बनाया जा रहा रेलवे का ओवर ब्रिज इस रास्ते से गुजरने वालों के लिए मुसीबत का सबब बनते जा रहा है। जिस मंथर गति से काम चल रहा है उससे समय पर काम पूरा होगा इसकी संभावना नहीं है। जब तक ओबी का काम पूरा नहीं होगा तब तक इस समस्या का समाधान नहीं होगा।

दोनों ओर रोड बनाया गया है, नियत समय पर काम पूरा होने की संभावना नहीं है। इसकी एक वजह देरी से ड्राइंग डिजाइन मिलना भी है। सड़क में बिजली लगाने का काम हमारा नहीं है। अभी वह एरिया पंचायत क्षेत्र में आता है, इसलिए उसको व्यवस्था करनी चाहिए। रमेश कुमार वर्मा, एसडीओ सेतु निगम

गेट खुलने के बाद एक ही रोड से गुजरते भारी व छोटे वाहन

जांजगीर-चांपा एनएच 200 में मुंबई-हावड़ा रेलवे रूट में जांजगीर व चांपा के बीच खोखसा फाटक के पास रेलवे द्वारा ओवर ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। 15 करोड़ 81 लाख की लागत से बनने वाल पुल के निर्माण शुरू करने के लिए वर्क ऑर्डर 3 साल पहले 17 जनवरी 13 को हो गया था पर कार्य अभी तक आधा भी नहीं हो पाया है। पुल और पहुंच मार्ग मिलाकर पुल की लंबाई 11 सौ 69 मीटर है। पुल का निर्माण कार्य जून 14 से शुरू हुआ है पर कार्य धीमी गति से चल रहा है।

चांपा की ओर पाए खड़े कर दिए गए हैं, कुछ स्लेब भी ढ़ाल दी गई है, लेकिन जांजगीर की ओर अभी तक केवल पाए ही पूरी तरह से खड़े नहीं हो पाए हैं।

अक्सर लगता है जाम, निर्माण कार्य के चलते सड़क हो गई है संकरी
रास्ते भर अंधेरा
वन वे से दुर्घटना की आशंका
आवागमन में परेशानी न हो इसके लिए ठेकेदार द्वारा डायवर्टेड रूट बनाया तो गया है, लेकिन यह रूट भी लोगों के काम का नहीं है। जगह- जगह पर निर्माण कार्य के लिए मटेरियल रखे हुए है जिसकी वजह से दूसरा रास्ता पूरी तरह से बंद है। इस कारण भारी से लेकर छोटे वाहनों तक को एक साथ एक ही रास्ते से गुजरना पड़ता है। सड़क पर पानी का छिड़काव नहीं होने के कारण धूल भी दिन भर उड़ती रहती है। करीब आधा किमी तक एक ही रास्ते से दोनों ओर के वाहनों का आना-जाना होता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

ओवर ब्रिज के दोनों ओर रात में घुप्प अंधेरा रहता है, वाहनों के चलने से धुल की वजह से सामने से आ रहे भारी वाहनों की लाइट सीधी आंख में पड़ने के कारण भी अक्सर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। न तो एनएच ने इस रोड में लाइट की व्यवस्था की है और न ही पीडब्ल्यूडी ने ही इस पर ध्यान दिया है।

ड्राइंग डिजाइन बना कारण
ओवर ब्रिज का काम मंथर गति से चल रहा है, सरकार द्वारा काम पूरा करने के लिए 31 मार्च 2016 तक का समय दिया गया है, लेकिन अभी तक काम मात्र 65 प्रतिशत ही हो पाया है। लगभग डेढ़ माह का समय शेष है , इस अवधि में काम पूरा हो पाने की संभावना ही नहीं है। इस विलंब के लिए अब रेलवे को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। सेतु निगम के अधिकारी का कहना है कि ड्राइंग डिजाइन विलंब से मिलने व भू अर्जन की प्रक्रिया में देरी होने के कारण वर्क ऑर्डर के लगभग डेढ़ साल बाद काम प्रारंभ हो पाया है।

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