क्रोकोडायल पार्क के सामने मगरमच्छ ट्रेन से कटा
भास्कर न्यूज | जांजगीर- चांपा
बिलासपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर कोतमी सोनार स्थित क्रोकोडायल पार्क के ठीक सामने शुक्रवार सुबह 6 बजे ट्रेन से कटकर एक मगरमच्छ की दर्दनाक मौत हो गई। घटनास्थल पार्क से बमुश्किल आधा किलोमीटर दूर है। मृत मगरमच्छ नर था और उसकी आयु 3 से 4 वर्ष के करीब बताई जा रही है। क्रोकोडाइल पार्क के सामने हुए इस हादसे से पार्क प्रबंधन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गए हैं।
कोतमी सोनार प्रदेश में मगरमच्छ के गांव के रूप में जाना जाता है। छत्तीसगढ़ का पहला क्रोकोडाइल पार्क यहां वर्ष 2007 में स्थापित किया गया। बताया जाता है कि सुबह 6 बजे मगरमच्छ स्टेशन के पास रेल की पटरियों को पारकर दूसरी “र जाने का प्रयास कर रहा था, उसी समय ट्रेन आ गई। ट्रेन के पहिए के नीचे आने से मगरमच्छ का गला कट गया। इसकी सूचना पार्क के स्टाॅफ को दी गई। लिहाजा, प्रावधानों के मुताबिक मगरमच्छ के शव का पोस्टमार्टम अकलतरा के सहायक पशु चिकित्सक श्रीवास्तव से कराया गया।
प्रबंधन की लापरवाही- क्रोकोडायल पार्क में वर्तमान में 210 मगरमच्छ संग्रहित कर रखे गए हैं और इनकी सुरक्षा के लिए बाउंड्री के साथ काफी ऊंची फेंसिंग की गई है। बताया जाता है कि ट्रेन से कटने वाला मगरमच्छ पास के सोढ़िया तालाब से आया था। तालाब में मगरमच्छ के होने की जानकारी पार्क प्रबंधन को थी। इसके बावजूद उसे पकड़कर पार्क में नहीं लाया जा सका। पार्क और रेलवे स्टेशन के बीच बमुश्किल आधा किलोमीटर दूर है। वहीं, जिस सोढ़िया तालाब से मगरमच्छ के रेलवे लाइन तक पहुंच कर कटने की बात कही जा रही है, उसकी दूरी बमुश्किल 40 मीटर है। तालाब रेलवे स्टेशन के नजदीक है।
प्रबंधन के पास जाल नहीं
पार्क के पूर्व प्रभारी छोटेलाल मरकाम का कहना है कि सोढ़िया तालाब में मगरमच्छ के होने की जानकारी महीनेभर पहले मिली थी, परंतु इसे पकड़ कर लाने के लिए उनके पास उचित व्यवस्था नहीं है। मगरमच्छ को पकड़ने के लिए खरीदा गया जाल काफी पुराना हो चुका है, जो उपयोग के लायक नहीं रह गया है। दिसंबर में पाराघाट तालाब से मगरमच्छ को पकड़वाने की मांग की गई थी, उस वक्त विभाग की “र से पंचायत को अपने जाल के जरिए उसे पकड़ कर पार्क को सौंपने कहा गया था। पार्क के कर्मचारियों की मदद से मगरमच्छ को सुरक्षित पार्क में लाया गया।
रेलपटरी पर मगरमच्छ का अवशेष