8 करोड़ का भुगतान लंबित
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चंापा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी याेजना केंद्र सरकार की महती योजना है। इस योजना में कार्यरत मजदूरों की मजदूरी के लिए भुगतान केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है, लेकिन मजदूरी देने के लिए केंद्र सरकार ने ही हाथ खिंच लिए हैं। इस वजह से पिछले पखवाड़े भर से मजदूरों का भुगतान अटक गया है। जिले में करीब आठ करोड़ का भुगतान लंबित है।
दस साल पहले यूपीए सरकार ने गांव के मजदूरों को गांव में ही काम दिलाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना शुरू की थी। सरकार बदलने के बाद एनडीए की केंद्र में सरकार बनी इस सरकार ने भी इस योजना की तारीफ करते हुए इसे जारी रखा है। इस योजना के तहत मजदूरों को 159 रुपए की दर से मजदूरी का भुगतान किया जाता है। साथ ही एक परिवार को कम से कम डेढ़ सौ दिनों का रोजगार देने का प्रावधान है, राज्य सरकार ने प्रदेश के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में दो सौ दिन काम देने का वादा किया है। पर सरकारों का वायदा अब केवल कागजों में ही दिख रहा है। मनरेगा के मजदूरों का पूरा पैसा केंद्र सरकार ही देती है, यह पैसा केंद्र के खाते से राज्य सरकार के खाते में अंतरित होती है इसके बाद सीधा मजदूरों के खाते में राशि आबंटित कर दी जाती है। लेकिन मजदूरों को भुगतान करना अब केंद्र सरकार के लिए कठिन साबित हो रहा है। शायद इसी वजह से अब केंद्र सरकार मजदूरों का भुगतान करने में लेटलतीफी कर रही है। स्थिति यह है कि जिले में कार्यरत मजदूरों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है। जिले के मजदूरों को 8 करोड़ का भुगतान करना अभी बाकी है। जिले में इस समय 4610 कार्य चल रहे हैं जिसमें से मात्र 546 पूरे हो पाए हैं, जबकि 4064 कार्य अभी भी अधूरे हैं। 80 प्रतिशत मजदूरों का खाता पोस्ट आॅफिस में होने के कारण वैसे भी मजदूरों को भुगतान पाने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है, अब सरकार से ही फंड नहीं मिलने की स्थिति में यह इंतजार और बढ़ता ही जाएगा।
मनरेगा के तहत मजदूरों को रोजगार मूलक काम दिए जा रहे हैं। वर्तमान में मजदूरों का करीब 8 करोड़ रुपए भुगतान बकाया है, केंद्र सरकार से ही राशि नहीं मिलने के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा है। विजेंद्र सिंह, एपीओ जिला पंचायत जांजगीर
विलंब के लिए सरकार दोषी तो कार्रवाई कैसे होगी
मनरेगा के मजदूरों को काम करने से लेकर 15 दिनों में भुगतान का प्रावधान है। समय पर मजदूरों को भुगतान नहीं मिल पाता इस वजह से इस अधिनियम में वर्ष 2013 में बड़ा बदलाव करते हुए विलंब के लिए जिम्मेदारी तय करते हुए विलंब करने वाले संबंधित व्यक्ति से मजदूरी के साथ ब्याज दिलाने का प्रावधान तय किया गया है, लेकिन अभी तक इस नियम का पालन नहीं हो पाया है। इस बार भुगतान में विलंब के लिए तो केंद्र सरकार ही जिम्मेदार है तो कार्रवाई कैसे होगी।
64 हजार 59 परिवारों को ही काम दिला पाए
जिला पंचायत के अनुसार 2 लाख 39 हजार 237 परिवारों को जॉब कार्ड दिया गया है, जबकि 1 लाख 14 हजार 565 परिवार ने रोजगार की मांग की है। इसके विरुद्ध 64 हजार 59 परिवारों को ही काम दिला पाए हैं। इसमें भी मात्र 28 हजार 454 परिवार काम कर रहा है। दावा तो सभी मजदूर परिवार को डेढ़ सौ दिनों का काम देने का दावा है, लेकिन मात्र 1 हजार 222 परिवार को ही जिले में सौ दिनों का रोजगार मिल पाया है।