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कौमी एकता की मिसाल है बाबा इंसान अली की दरगाह

6 वर्ष पहले
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कोरबा|शाहंशाहे छत्तीसगढ़लुतरा शरीफ में चौथे दिन के उर्स पाक में जायरिनों ने रायपुर, बिलासपुर, तखतपुर कोरबा, जांजगीर चांपा अन्य स्थानों से अकिदत की चादर लेकर इंसान अली के दरबार में पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ाई। उर्स के चाैथे दिन आॅल इंडिया नातिया मुशायरा का प्रोग्राम हुआ। जिसमें देश के नामी गीरामी शायर सकील आरफी फार्रूखाबादी, नसीम सहर (गयावी) वासिफ रजा, कार्यक्रम में अपने सायरी का फन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की सरपरस्ती दरगाह के सज्जा नसीन हाजी मान खां ने की। मुशायरे का मुख्य मिसरा नबी का जिक्र जब होता है महफिल जगमगाती है मनकबत का मिसरा नाजिशे लौह वकलम इंसान अली का है से अपनी रंग जमाए रहे। इन सायरों ने अपने कलामों से अलावा देश की एकता अखण्डता पर भी नज्म सुनाकर कौमी एकता का संदेश दिया। उर्स में दरगाह जायरत करने पहुंचे संभागीय कमीशनर सोनमणी बोरा, ने जायरीनों कहा कि लुतरा शरीफ दरगाह भारत बड़े दरगाह में से एक है।



बाबा इंसान अली की दरगाह कौमी एकता के मिसाल भी प्रस्तुत करता है। सोनमणी बोरा ने कहा कि लुतरा शरीफ मे विकास की आपार संभावनाए है मास्टर प्लान के साथ विकास करेंगे। विनित नंदन ने कहा कि लुतरा शरीफ दरगाह छत्तीसगढ़ का अजमेर है। बाबा की दरगाह कौमी एकता का मिसाल प्रस्तुत करता है। यहां हर धर्म के लोग अपनी अकीदत का गुलदस्ता पेश करते हैं। इस दौरान दरगाह इंतेजामिया कमेटी के अध्यक्ष हाजी अखलाक खान, नशीन हाजी मांन खां, जनरल सेक्रेटरी कारी शब्बीर अहमद, हाजी शेर मोहम्मद हाजी रफीक अहमद समेत कमेटी के लोग उपस्थित थे।