पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • आर्किटेक्ट सर्वे करने नहीं आ रहा, बारिश में होगा जल जमाव

आर्किटेक्ट सर्वे करने नहीं आ रहा, बारिश में होगा जल जमाव

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

बरसात के पानी को शहर से बाहर निकालने के लिए व्यवस्थित नाली बनाने की मंशा तो पालिका की है, पर इस पर अमल नहीं हो पा रहा है। पूरे शहर की नालियों को एक साथ मिलाकर पानी बाहर निकालना है पर नाली के लिए ड्राइंग डिजाइन तो दूर सर्वे तक नहीं हो पाया है। ऐसा ही रहा तो आसन्न बरसात में फिर से लोगों को वार्डों में जल जमाव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

बरसात में पानी की निकासी जिला मुख्यालय की सबसे बड़ी समस्या है। वार्ड नंबर 6, लिंक रोड के दोनों ओर, वार्ड नंबर 17, इंदिरा नगर सहित बस्ती के कई वार्ड ऐसे हैं जहां पर प्रति वर्ष बारिश में जल जमाव की स्थिति निर्मित होती है। अव्यवस्थित बसाहट व अव्यवस्थित नाली निर्माण का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पूर्व में जो नालियां बनाई गई वह तत्कालीन समय के लिए ठीक रही होगी, लेकिन शहर विकास की योजना बनाने वाले तत्कालीन जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को शहर के विकसित व भविष्य के अनुसार प्लान बनाकर दूरदर्शीता के साथ नालियांे व सड़कों की प्लानिंग करनी थी ताकि आने वाले सालों तक दिक्कतें न होती, लेकिन ऐसा न कर पलन करते हुए सड़कों व नालियों का निर्माण कर दिया गया है। अब विकसित शहर को इन्हीं सब दोषों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि जो नालियां बनाई गई हैं उन नालियों में वार्डों अथवा गलियों की छोटी नालियाें की कनेक्टिविटी नहीं है, जिसके कारण वार्डों का पानी बड़े नाला में नहीं जा पाता और वार्डों में भी भर जाता है। वहीं नाला भी आवश्यकतानुसार ढाल देकर नहीं बनाया गया है जिसके कारण नालों का पूरा पानी शहर से बाहर नहीं निकल पाता और नाली का गंदा पानी भी सड़कों पर बहता रहता है। इन सब दिक्कतों को देखते हुए राज्य सरकार ने दो साल पहले से ही यह तय किया है कि जब तक व्यवस्थित नाली का प्लान नहीं बन जाता तब तक नालों का काम नहीं कराया जाएगा। पूर्व परिषद में कांग्रेस शासक थे इस वजह से भी राज्य सरकार ने इसे प्राथमिकता से नहीं लिया। इसके बाद सत्ता परिवर्तन होते ही नालियों के लिए सर्वे कराने के लिए रायपुर के राजहंस आर्किटैक्ट कंपनी को ठेका करीब तीन माह पहले दिया गया है। इस कंपनी के नुमाइंदे यहां का निरीक्षण कर वापस लौट भी गए हैं लेकिन लौटने के बाद दोबारा वे यहां नहीं आए हैं।

आर्कियोलॉजिकल सर्वे नहीं तो काम नहीं
दूसरी ओर विभागीय मंत्री अमर अग्रवाल ने नगर के बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था के लिए दो टूक कह दिया है कि जब तक आर्कियोलॉजिकल सर्वे के बाद प्लान नहीं बन जाता तब तक नाली के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि सर्वे के बाद प्रस्ताव मिलते ही वे राशि स्वीकृत कर देंगे।





लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के कारण सर्वे का काम प्रारंभ नहीं हो पाया है। ठेकेदार न ताे सर्वे की रिपोर्ट दे रहा है और न ही पालिका के अधिकारियों का फोन ही रिसीव कर रहा है।

अध्यक्ष ने लिखा पत्र बदलें ठेकेदार
नाली के लिए सर्वे करने व ड्राइंग डिजाइन बनाने में लापरवाही करने वाले रायपुर के राजहंस कंपनी को बदलने के लिए नपाध्यक्ष ने विभागीय मंत्री को पत्र लिखा है साथ ही यह भी कहा है कि इसे बदल कर जल्दी ही किसी दूसरे ठेकेदार को जांजगीर के लिए नियत करें ताकि समय पर सर्वे व ड्राइंग डिजाइन का काम पूरा हो सके।

रायपुर के जिस कंपनी को सर्वे करने व नाली की ड्राइंग डिजाइन बनाने के लिए ठेका दिया गया है उसके द्वारा न तो सर्वे किया जा रहा है और न ही ड्राइंग डिजाइन दिया जा रहा है। उसे बदलने के लिए विभागीय मंत्री को पत्र लिखा गया है। समय पर काम नहीं होने से लोगों को दिक्कतें हो सकती है। सौरभ शर्मा, सीएमओ नगर पालिका जांजगीर- नैला

क्या करना है

कंपनी को
उम्मीद तो थी पर

टूटती जा रही
जिस कंपनी को राज्य सरकार ने जांजगीर शहर की बरसाती पानी को बाहर निकालने के लिए प्लान बनाने की जिम्मेदारी दी है। वही पूरे शहर का सर्वे करेगी कि किस स्थान से कैसी नाली बनाई जाए ताकि पानी बाहर निकल सके। सर्वे के बाद वे ही नालियों के लिए लेवलिंग का काम कराएंगे। इसके बाद वे ड्राइंग डिजाइन तैयार कर इस्टीमेट बनाकर देंगे। उन्हीं के इस्टीमेट के अनुसार पालिका द्वारा राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। राशि मंजूर होने पर फिर टेंडर आदि की प्रक्रिया होगी।

और फिर काम प्रारंभ हो सकेगा



इन सब कार्यों को करने में समय तो लगेगा लेकिन नगर के लिए एक- एक दिन महत्वपूर्ण है।

राजहंस कंपनी कर्मी जब यहा ंनिरीक्षण के लिए आए थे, तब जल्दी काम शुरू होने की संभावना थी। उम्मीद थी कि सर्वे जल्दी शुरू हो जाएगा तो बारिश के पहले युद्ध स्तर पर काम शुरू कर लोगों को फौरी तौर पर इस बारिश में जल जमाव की स्थिति से छुटकारा मिल सकता था, पर बेशकीमती 3 माह का समय संबंधित कांट्रेक्टर के भरोसे बीत गया है, पर उसने ड्राइंग डिजाइन बनाकर देना तो दूर सर्वे का काम नहीं किया है। इस से काम लगातार पिछड़ रहा है। उम्मीद टूट रही है।





, क्योंकि सर्वे के बाद ही यह तय होगा कि नाला इस वर्ष बन पाएगा कि नहीं

ऐसी नालियों को बड़े नाले से जोड़कर शहर से बाहर निकाला जाएगा पानी

खबरें और भी हैं...