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पितृ देवताओं को दी गई विदाई

7 वर्ष पहले
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जांजगीर| पखवाड़ाभर पितरों की पूजा तर्पण के बाद पितृ मोक्ष अमावस्या पर पितरों को विदाई दी गई। भादो माह की पूर्णिमा तिथि से शुरू हुए पितृ देवताओं की पूजा का पर्व पितृपक्ष अमावस्या के साथ ही समाप्त हो गया।

पितृपक्ष में लोगों ने अपने पितृ देवताओं की तृप्ति के लिए तालाब नदियों में तिल, जौ, कुशा से जलांजलि दी घरों में पार्वण श्राद्ध भी किया गया। ब्राम्हणों ों को भोजन कराने का विशेष विधान होने के कारण लोगों ने अपने पितरों के निमित्त ब्राह्मण भोज करा कर दान भी दिया। गुरूवार को बड़ा, बबरा आदि बनाकर भोग लगाया गया तथा महिलाओं ने पितृ देवताओं से क्षमा याचना करते हुए सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी गई। उसके बाद हवन पूजा की राख को तालाब नदी या नहरों में प्रवाहित किया गया।