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ओजोन परत को बचाने का दिया संदेश

7 वर्ष पहले
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विश्वओजाेन दिवस के मौके पर मंगलवार को शहर के एनईएस पीजी कॉलेज में गोष्ठी सहित नारा लेखन, पोस्टर प्रश्न मंच प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसके कई वक्ताओं ने अपने विचार रखकर ओजोन परत की स्थिति पर चिंता जाहिर की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सतीश देशपांडे थे। यह आयोजन रसायन शास्त्र विभाग के द्वारा किया गया था।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. देशपांडे ने कहा कि विकसित देशों की भूमिका ओजोन परत को प्रभावित करने की अधिक रही है। इसके संरक्षण के लिए विकसित देशों को विशेष पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ओजोन परत के पतली होने के कारण कई समस्याएं सामने रहीं हैं। विकसित देश में खतरनाक रसायनों का प्रयोग अधिक होता है। जो ओजोन परत को प्रभावित करते हैं।

रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संजय जैन ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिले में 1986 में रसायन संकाय की स्थापना हुई थी और इस विभाग के माध्यम से कई छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित किया। उन्होंने इस अवसर पर अपनी कविता के माध्यम से उन कारकों से बचने की बात कही, जिससे ओजोन परत प्रभावित हो रही है। वनस्पति शास्त्र के प्राध्यापक डीआर राठिया ने कहा कि आज इस समस्या को लेकर गहराई से चिंतन करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि आज की स्थिति में एक प्रतिशत ओजोन लेयर में कमी होने से विश्व के पांच हजार लोग अतिरिक्त मोतियाबिंद से प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि ओजोन से ही पराबैंगनी किरणों का अवशोषण होता है, जिसके प्रभावित होने से विश्व के परिदृश्य की कल्पना की जा सकती है।

प्रो. अनिल श्रीवास्तव ने ओेजाेन परत की समस्या से बचने के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण करने और अपने पर्यावरण को संरक्षित करने की बात कही। गोष्ठी को प्रो. अमरेंद्र, डॉ. जेपी कुजूर, प्रो ज्योति तिर्की, अतिथि शिक्षक ऋषभ पांडेय, दीपक कुमार ने भी संबोधित किया। छात्रा संतोषी बाई ने इस अवसर पर कविता पाठ किया। गोष्ठी का संचालन छात्रा हेमा मिश्रा रोजावान लकड़ा ने किया।

विश्व ओजोन दिवस पर नारा लेखन, पोस्टर बनाओ एवं प्रश्न मंच प्रतियोगिता भी आयोजित की कई थी। जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पोस्टर प्रतियोगिता में अभिषेक भगत प्रथम स्थान पर रहे। दूसरा स्थान जगदीश राम तीसरा स्थान निकेश्वर बंजारा को मिला। इसी प्रकार ना