भगवान भास्कर के मंत्रों से गूंज उठा बालाजी मंदिर का प्रांगण
अचला सूर्य सप्तमी पर रविवार को शहर का बालाजी मंदिर भगवान भास्कर के वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। पूजन समारोह का आयोजन यहां के भास्कर शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज ने किया था। माघ शुक्ल सप्तमी तिथि को अचला सूर्य सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों में इस तिथि को रथ, सूर्य, भानु, अर्क, महती व पुत्र सप्तमी भी कहा गया है। हर साल यहां के श्री बालाजी मंदिर में अचला सूर्य सप्तमी पर शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज द्वारा भगवान भास्कर की सामूहिक अाराधना की जाती है।
समाज के सदस्य सुबह घरों में पूजा-अर्चना कर मंदिर में एकत्र होने लगे थे। पूजन मंडप में सबसे पहले गौरी-गणेश पूजन व कलश स्थापना के बाद नवग्रह, षोडश मातृका, सप्त घृत, पंच लोकपाल, दस दिकपाल व क्षेत्रपाल की पूजा की गई। इसके बाद समाज के अराध्य देव सूर्य की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। भगवान सूर्य का हवन सूर्य सुक्त से किया गया। हवन के बाद पूर्णाहूति की गई। इसके बाद सूर्यदेव को अर्ध्य दिया गया व मंगलाष्टक का सामूहिक पाठ किया गया। पूजन, हवन व पूर्णाहुति के बाद प्रसाद वितरण एवं समाज के सदस्यों ने सामूहिक भोज किया।
सूर्य सप्तमी के मौके पर रंगोली बनाती युवतियां।
पूजा करते हुए समाज के लोग
प्रतिभाओं को पुरस्कार
हुई प्रतियोगिताएं
सूर्य सप्तमी के मौके पर समाज के सदस्यों के लिए रंगोली एवं पुष्प सज्जा का आयोजन किया गया था। जिसमें बच्चियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। रंगोली प्रतियोगिता में रितु पाठक ने प्रथम, प्रेरणा मिश्रा ने द्वितीय व भक्ति पाठक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं पुष्प सज्जा स्पर्धा में शाश्वत पाठक पहले स्थान पर रहे। इसके अलावा बीते साल 10 वीं कक्षा में सबसे अधिक अंक लाने वाली अंजलि मिश्रा को भी पुरस्कृत किया गया। समाज के वरिष्ठ सदस्य व अधिवक्ता विनायक दत्त शर्मा ने विजयी प्रतिभागियों को अपनी ओर से दीवार घड़ी प्रोत्साहन के लिए प्रदान किया। इसके अलावा समाज ने अपने बुजुर्गों स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्राणशंकर मिश्रा, कालीनाथ मिश्रा व उनकी प|ी, रामपरीक्षण मिश्रा, रामजी मिश्रा व उनकी प|ी, लक्ष्मण पांडेय का सम्मान किया गया।
सूर्य सप्तमी पूजा