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अंधविश्वास हावी, नहीं थम रहे टोनही प्रताड़ना और हत्या के मामले
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गुरूवारको टोनही की शक में दो महिलाओं की हत्या ने जिले को स्तब्ध कर दिया है। जशपुर जिले में अब भी अंधविश्वास हावी है। यहां जादू-टोने को लेकर प्रताड़ना हत्या के मामले थम नहीं रहे हैं।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं, इस बात से स्पष्ट होता है कि अंधविश्वास में ग्रामीण किसी की जान तक लेने में नहीं हिचकते। ऐसी कई घटनाएं सामने चुकीं हैं, जब टोनही के शक पर हत्या की वारदात की गई है। जिले के क्षेत्रों में अब तक यह देखा गया है कि एकांकी जीवन व्यतीत करने वाले विधवा और वृद्ध ऐसे लोगों का निशाना बनते है और उन्हें जादू-टोना के शक में मारपीट के शक के साथ-साथ उनकी हत्या जैसे अपराध को अंजाम दे बैठते है। किसी के घर में कोई बीमारी हुई या किसी की मौत तो उसे जादू टोना का रंग दे दिया जाता है। बीमारी में अस्पताल कम बैगा गुनिया के पास लोग ज्यादा पहुंचते है और बैगा गुनिया को जादू-टोना से हुई बीमारी कहते देर नहीं लगती।
इसी साल 16 सितंबर को आस्ता थाना क्षेत्र के ग्राम हर्रापाठ में भी जादू-टोने की शक में एक वृद्ध मौेत के घाट उतारा गया था। गांव के बंधन राम पिता खसरू (65) को आरोपी युवक विश्वनाथ (26) ने टांगी मारकर उसकी हत्या कर दी थी। ज्यादातर मामलों में हत्या करने वाले आरोपी अशिक्षित ही रहे।
25 मई 14 की रात आस्ता थाना क्षेत्र के अंधला गांव में तीन महिलाओं ने एक वृद्ध दंपती को लाठी से पीट-पीटकर मार डाला था। मामले में गांव की अंजना तिर्की (34), अलबेनिया कुजूर (58) एवं करूणा तिर्की (55) ने पात्रिक कुजूर (62) एवं उसकी प|ी अलबेसिया कुजूर (58) की हत्या की थी।
इसके पहले 3 जनवरी14 में कासांबेल के ग्राम केरामुंडा में टोनही की शंका पर 55 वर्षीय वृद्धा सावित्री पति स्व. नान राम की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में गांव का ही युवक चंदर राम पिता शंकर राम के खिलाफ हत्या और टोनही प्रताड़ना का जुर्म दर्ज किया था।
वर्ष मामले
200709
200806
200921
201015
201116
201217
201313
201407
कहां गई अंधविश्वास उन्मूलन समिति
जिलेमें ग्रामीणों को अंधविश्वास के मकड़जाल से निकालने और उनमें जागरूकता लाने अंधविश्वास उन्मूलन समिति का गठन किया गया था। पर समिति का गठन