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जिले के भूगर्भ जल स्रोतों का हो सकेगा संपूर्ण परीक्षण

7 वर्ष पहले
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जिलेके भूगर्भ जल स्रोतों का अब संपूर्ण परीक्षण हो सकेगा। पेयजल स्रोतों में विभिन्न केमिकल की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके लिए शहर के एन ईएस कॉलेज के रसायन शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संजय जैन के रिसर्च प्रोजेक्ट ‘पीरियोडिकल स्टडी ऑफ डिफरेंट ग्राउंड वाटर सोर्सेस ऑफ जशपुर डिस्ट्रिक विथ रिफरेंस टू इट्स फिजिको-केमिकल कैरेक्टेरिस्टिक’ को यूजीसी की मंजूरी मिल गई है। रसायन शास्त्र ही नहीं बल्कि समूचे विज्ञान संकाय में जिले का यह पहला रिसर्च प्रोजेक्ट, जिसे विश्वविद्यालय की अनुमति मिली है। इस बारे में प्रो. संजय कुमार जैन ने बताया कि यह रिसर्च प्रोजेक्ट 2 साल का है। इसके अंतर्गत जिले के चिह्नांकित पेयजल स्रोतों का संपूर्ण परीक्षण कर उसकी गुणवत्ता उपयुक्तता पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

इसके लिए पेयजल स्रोतों के नमूने लेकर उनके पी एच, हार्डनेस, आयरन, फ्लोराइड, सोडियम, पोटेशियम, अम्लीयता, क्षारीयता, कार्बोनेट, क्लोराइड सहित 24 पैरामीटर की अत्याधुनिक मशीनों से जांच की जाएगी। जिससे पेयजल में रसायन की मात्रा निर्धारित मानकों से कम है या अधिक, इसका पता चल सकेगा। प्रो. जैन के रिसर्च प्रोजेक्ट को यूजीसी की मंजूरी मिलने पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सतीश देशपांडे, पर्यटन मंडल के पूर्व अध्यक्ष कृष्णकुमार राय सहित कॉलेज के प्राध्यापकों, कर्मचारियों मित्रों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

मौके का मुआयना करते प्रो. जैन

क्षेत्र भर के जल स्त्रोंतों की होगी जांच

काफी अहम साबित होगा रिसर्च

जिलेके कई पेयजल स्रोतों में हार्डनेस, आयरन फ्लोराइड आदि की अधिकता की खबरें मिलती रहती हैं। इसके अलावा औद्योगिक घरेलू अपशिष्ट से भी पेयजल स्त्रोत दूषित होते हैं। जिसके चलते जल स्रोतों से गंदा मटमैला पानी निकलने की शिकायत मिलती है। जिसके सेवन से स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इस लिहाज से यह रिसर्च प्रोजेक्ट काफी अहम साबित हो सकता है। इस रिसर्च से पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता का निर्धारण हो सकेगा।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ स्टडी के सदस्य हैं प्रो. जैन

इसरिसर्च प्रोजेक्ट को करने वाले प्रो. जैन पीएससी की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में रसायन शास्त्र में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर चयनित हुए थे। बीते साल उन्हें सरगुजा विवि ने केमेस्ट्री की बोर्ड ऑफ स्टडी में सदस्य बनाया गया था।