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40 साल बाद भी नहीं मिल रहा नहर से खेतों को पानी
किसानोंके हर खेतों में पानी पहुंचा कर दो फसली फसल लेने के लिए बनाए गए शेखरपुर व्यावर्तन नहर योजना का लाभ क्षेत्र के किसानों को नहीं मिल रहा है। शेखरपुर व्यावर्तन योजना को लगभग 1974 में तैयार किया गया था। पर 40 वर्ष बीतने के बाद भी इस योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पाया है और ही कभी इस नहर की मरम्मत की गई है।
विभाग के देखरेख की कमी के कारण यह नहर पूरी तरह से टूट-फूट गया है। ग्राम शेखरपुर के पुरुषोत्तम पैकरा, आसरन, उग्रसेन मुरली डनसेना ने बताया कि कि शेखपुर व्यावर्तन नहर योजना को इसलिए बनाया गया था कि क्षेत्र के किसान दो फसली फसल ले सकें। पर आलम यह है कि किसानों को नहर का पानी मिलता ही नहीं है। विभाग के अधिकारी भी क्षेत्र में आकर नहर की देख-रेख करने के प्रति संजीदा नहीं हैं। किसान कई बार अपनी समस्याएं अधिकारियों को बता चुके हैं। पर अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगती। मुरली डनसेना ने बताया कि साल में एक बार सब इंजीनियर आते हैं। वे बिना नहर में पानी दिए, केवल पानी का टैक्स लेने के लिए ही आते हैं। बाकी दिनो में कोई अधिकारी या कर्मचारी यहां आकर किसानों की समस्या नहीं पूछते हैं।ं नहर में पानी नहीं आने से क्षेत्र के भैंसामुंडा, पतराटोली, पंडरीपानी, शेखरपुर, रोघापारा, सहित दर्जन भर गांव के सैकड़ों किसानों को पानी नहीं मिल रहा। जिससे ग्रामीणों में सिंचाई विभाग के प्रति काफी रोष पनप रहा है।
मुरली डनसेना ने बताया कि अभी दो सप्ताह पहले शेखरपुर के 40 किसानों द्वारा गांव में बैठक कर नहर की मरम्मत करने का निर्णय लिया गया। जिसके बाद ग्रामीणों ने अपने ढंग से नहर की मरम्म्त की है। वही इस संबंध में ग्रामीण विभाग को भी अवगत करा दिए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वे नहरों से पानी देने का भी मांग कई बार कर चुके हैं। अभी तक विभाग के द्वारा किसी प्रकार की कोई पहल नहीं की गई। जिससे अभी खड़ी फसल के नुकसान होने का भय सता रहा है।
40 किसानों ने मिल कर की मरम्मत
^गांव नहर निगरानी समिति के अध्यक्ष सदस्य हैं। उनकी हमसे अधिक जिम्मेदारी बनती है। उनके द्वारा मरम्मत करना चाहिए। वहां से पिछले कई सालों से टैक्स नहीं मिला है। एसकेधमिजा, एसडीओ,सिंचाई विभाग, पत्थलगांव