पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • \"हिंदी एकता के सूत्र में पिरोने वाली भाषा\'

\"हिंदी एकता के सूत्र में पिरोने वाली भाषा\'

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
यहांके शासकीय विजय भूषण सिंहदेव कन्या महाविद्यालय में रविवार को राष्ट्रीय सेवा योजना एवं हिंदी विभाग ने हिंदी दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष श्रीमती एम कुजूर ने हिंदी दिवस के आयोजन के उद्देश्य एवं आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1948 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा घोषित किया था। इसी कारण से 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

कार्यक्रम में एमए अंतिम की छात्रा अनिता कुजूर ने हिंदी का प्रयोग अधिक से अधिक करने के अनुरोध के साथ बताया कि हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है और इसी भाषा के माध्यम से हम एकता के सूत्र में बंधे हुए है। छात्रा तरसीमा ने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान यदि किसी तत्व ने सभी भारतीयों को एक सूत्र में पिरोया था, तो वह है हिंदी भाषा। अलना बाई ने बताया कि हमें हिंदी पर गर्व करना चाहिए कि देश में जनगणना 2011 के अनुसार 13.15 लाख लोगों में बोली एवं समझी जाती है। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. विजय रक्षित ने बताया कि ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना के विकास में सबसे अधिक योगदान रहा है, तो वह है हिंदी भाषा का। आंदोलन के दौरान संपूर्ण देश को एकता के सूत्र में बांधने का काम भी हिंदी भाषा ने किया। 20 वीं शताब्दी के पहले दशक में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के सभी नेता एक ऐसी भाषा की तीब्र आवश्यकता का अनुभव कर रहे थे, जिससे वे अपनी बात पूरे देश तक सीधे-सीधे पहुंचा सकें। इसमें हिंदी और अहिंदी भाषी क्षेत्र के सभी नेता शामिल थे। इन राष्ट्रीय उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जब एक सार्वदेशिक भाषा के चयन का प्रश्न आया, तब इन नेताओं का ध्यान स्वाभाविक रूप से हिंदी की ओर गया। इस दृष्टि से सबसे पहले विचार करने वालों में बंगाली भाषी केशवचंद्र सेन थे। उन्होंने अपने पत्र ‘सुलभ समाचार’ में लिखा कि इस समय भारत में जितनी भी भाषाएं प्रचलित हैं, उनमें हिंदी भाषा सर्वत्र प्रचलित है।

हिंदी को भारत की एक भाषा स्वीकार कर लिया जाए, तो सहज ही एकता हो सकती है। आज हमें पुनः हिन्दी के विकास एवं समृद्धि के लिए प्रयास करना चाहिए। जिससे हिंदी को उचित सम्मान प्राप्त हो सके। कार्यक्रम में छात्र संघ अध्यक्ष प्रीति एक्का, सचिव अर्चना तिग्गा, के अतिरिक्त कार्यक्रम