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जान हथेली पर रख जर्जर पुल पार करते हैं लोग

7 वर्ष पहले
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सरपझरियापुल जर्जर हुए 10 वर्ष से भी ज्यादा हो गया है। इसके बावजूद नए पुल का निर्माण नहीं करने से लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि लोक निर्माण विभाग द्वारा जर्जर चिह्नांकित कर पुल के दोनों तरफ मिट्टी के मेड़ बनाकर पुल को बंद कर दिया गया है। इसके बावजूद ज्यादातर दोपहिया वाहन सवार अभी भी जान खतरे में डालकर इस क्षतिग्रस्त पुल से गुजरते हैं। पुल के एक ओर डायवर्सन बनाया गया है। पर उसमें भी बड़े-बड़े गड्ढे बन जाने से हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

इस सड़क सहित डायवर्सन की मरम्मत हर साल की जाती है। पर महीना भर नहीं बीतता कि गड्ढे फिर से दिखने शुरू हो जाते हैं। यह सड़क जशपुर, अंबिकापुर सहित अनेक शहरों से ओडिशा के दर्शनीय स्थल पुरी, संबलपुर, राउरकेरा, झारसुगड़ा जैसे शहरों को जोड़ती है। वही इस एक मात्र मुख्य सड़क से रोज दर्जनों यात्री बसों सहित सैकडों दुपहिया चार पहिया वाहन गुजरते हैं। साथ ही व्यवसाय, इलाज सहित अनेक जरूरी कार्यों से क्षेत्रवासियों को आना-जाना लगा रहता है। पर कुनकुरी से लवाकेरा बार्डर तक सड़क की स्थिति काफी जर्जर है। वही हल्दी मुंडा के कसजोरा के पास नदी में अब भी अंग्रेज जमाने में बनी संकीर्ण पुलिया से वाहन गुजरने पर मजबूर हैं। पुल के ऊपर त्री बसें गुजरती हैं, तो साइड देने के लिए एक फीट भी जगह नहीं बचती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वाहन चालकों को कितनी परेशानी हो रही होगी। कुछ वर्ष पूर्व एक यात्री बस ट्रैक्टर को ठोकर मार कर नीचे गिरी थी। जिसमें कंडक्टर चूड़ामणी यादव की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बावजूद भी इस सड़क के लिए किसी को चिंता नहीं है।