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बालाजी मंदिर में वैदिक मंत्रों से होगी पूजा

7 वर्ष पहले
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यहांके ऐतिहासिक रियासतकालीन दशहरा महोत्सव की तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। शारदीय नवरात्रि के पहले ही दिन से यहां का ऐतिहासिक दशहरा महोत्सव प्रारंभ होता है। नवरात्रि प्रारंभ होने में अब केवल दो दिनों का ही समय बचा है।

इसके लिए शहर के श्री बालाजी मंदिर मां काली मंदिर में तैयारी शुरू कर दी गई है। मंदिरों का रंग-रोगन किया जा रहा है। साथ ही आसपास के क्षेत्र की सफाई की जा रही है। नवरात्रि की पहली तिथि से लेकर दशमी तक रोजाना यहां विधि-विधान से राजपरिवार के सदस्यों आचार्यों की उपस्थिति में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाते हैं।

मंदिरों में कलश स्थापना के साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। यहां के दशहरा उत्सव की एक विशेषता और है कि नवरात्रि के दौरान जगतजननी मां अंबे की पूजा वैदिक और तांत्रिक दोनों विधियों से की जाती है। मां काली मंदिर में तांत्रिक विधि-विधान एवं श्री बालाजी मंदिर में वैदिक विधि-विधान से अाराधना की जाती है। बालाजी मंदिर से ही विजयादशमी को भगवान बालाजी की रथ यात्रा निकाली जाती है। दोनों ही मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। इसके लिए दोनों मंदिरों में तैयारियां अब तेज हो गईं हैं।

मंदिर में रंग रोगन करते लोग।

दुर्गोत्सव की भी चल रही तैयारी

यहांशारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि को मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। शहर में श्री हरिकीर्तन भवन, संगम चौक दरबारी टोली, महापात्रे कॉलोनी में भव्य रूप से सार्वजनिक दुर्गोत्सव का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा जनपद कार्यालय के पास प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विवि द्वारा सजीव झांकी का प्रदर्शन किया जाता है। सार्वजनिक दुर्गोत्सव के दौरान गरबा, डांडिया धुवन नृत्य लोगों के मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। दुर्गोत्सव समितियों के सदस्य मां अंबे की स्थापना और उनकी अराधना की तैयारियों में जुटे हुए हैं।