स्कूल के बरामदे की छत गिरी बाल-बाल बचे 75 विद्यार्थी
हादसे से सकते में हैं छात्र और पालक
भास्कर न्यूज | जशपुर/पतराटोली
बुधवार को पूर्व माध्यमिक शाला पतराटोली में दोपहर डेढ़ बजे स्कूल के बरामदे का छज्जा भरभरा कर अचानक गिर पड़ा। इस समय तीनों कमरों में लगभग 75 छात्र और शिक्षक अध्ययन अध्यापन का कार्य कर रहे थे। अचानक हुए इस हादसे से शिक्षक सहम गए और बच्चों को कमरे के अंदर ही रखे शिक्षकों ने जब बाहर झांककर देखा तो पूरा छज्जा गिर गया था। शिक्षक यह देखने लगे की कोई छात्र इस समय बाहर तो नहीं था। यह तो एक संयोग ही था कि बरामदे में कोई भी बच्चा नहीं था और अंदर के कमरे में सभी बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। इस कारण से सभी सुरक्षित बच गए।
यह माध्यमिक शाला वर्षों से जर्जर अवस्था में है और इसकी सूचना बार-बार विभाग को देने के बाद भी ठीक से मरम्मत नहीं हो पा रही है, जिससे यहां अध्ययनरत छात्रों और अध्यापकों को जान सांसत में फंसी हुई है,लेकिन अधिकारी हैं कि सिर्फ कागजी कार्रवाई करने में ही मशगूल रहते हैं। बताया जाता है कि अंदर के कमरों का भी यही हाल है। छज्जे के बल्लियां सड़ गई है और जगह-जगह से दीमक भी कमजोर कर दिया है। यहां के निवासियों का कहना है कि यदि एक भी कमरे में उस समय इस हादसे के धमक के बाद छज्जा गिरा होता तो अनेकों छात्र हादसे के शिकार हो जाते। बाद में शिक्षकों ने कमरे में फंसे सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतराटोली भवन जहां के कमरों में पढ़ाई जारी रहने के दौरान हुआ हादसा।
मरम्मत करने वाली पर होगी कार्रवाई
मामले की जांच कराई जाएगी यदि भवन के मरम्मत में एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हिमशिखर गुप्ता, कलेक्टर जशपुरनगर
मरम्मत में लापरवाही
जर्जर शाला भवनों की हर वर्ष सूची मंगाई जाती है। समीक्षा बैठकों में जानकारी ली जाती है। यहां तक की हर वर्ष कई शाला भवनों के मरम्मत के नाम पर बड़ी राशि मंजूर किया जाता है। इस शाला भवन के लिए भी 2013-14 में जनपद शक्तिकरण जीर्णोद्धार योजना के अंतर्गत मरम्मत कर बाकायदा वहां स्लोगन लगा दिया गया है, लेकिन इसकी पोल तो बुधवार को हुए हादसे ने खोल कर रख दी है। यदि सही तरीके से जीर्णोद्धार की राशि का उपयोग होता तो ऐसी स्थिति नहीं बन पाती।
बुधवार को हुए हादसे से जहां छात्र और शिक्षक सहमे हुए हैं, वहीं पालको में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि हर वर्ष मरम्मत के नाम पर कुछ ना कुछ राशि मंजूर कर दी जाती है और मरम्मत के नाम पर संबंधित एजेंसी लीपा पोती कर चले जाते हैं और इसका बैठे बिठाए उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दिया जाता है। कड़ी मानिंटरिंग एवं गुणवत्ता की जांच नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति स्कूलों में होती है। इसका खामियाजा छात्रों, पालको और शिक्षकों को उठाना पड़ता है। इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।