- Hindi News
- दुष्कर्म पीड़िता के विरूद्व अब दर्ज होगा परिवाद
दुष्कर्म पीड़िता के विरूद्व अब दर्ज होगा परिवाद
दुष्कर्मकी पीड़िता के द्वारा न्यायालय में दिये गए बयान से मुकर जाने पर कड़ा रूख अपनाते हुए न्यायालय ने पीड़िता के विरूद्व धारा 193 आईपीसी परिवाद दर्ज कराने का आदेश दिया है। जानकारी के मुताबिक बागबहार थाना क्षेत्र की पीड़िता ने 30 जुलाई 2013 को आरोपी खेम सागर यादव पिता चुड़ामनी यादव ने उसके साथ अनाचार किया था।
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बागबहार पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 376 के तहत जुर्म दर्ज कुनकुरी के एडीजे न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था।आरोपी के विरूद्व अपराध दर्ज होने से पहले पीड़िता का कुनकुरी के एडीजे जेआर बंजारा के न्यायालय में धारा 164 के तहत बयान दिया था। मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पीड़िता ने घटना का विवरण देते हुए आरोपी पर लगाए गए आरोप को दोहराया था। न्यायालयीन बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी खेमसागर यादव को गिरफ्तार किया था। मामले में नया मोड़ मामले की सुनवाई के दौरान आया। एडीजे जेआर बंजारा के अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता ने पूर्व में न्यायालय में दिये गए अपने बयान से पलटते हुए बागबहार पुलिस के दबाव में न्यायालय में जबरन बयान दिए जाने का आरोप लगाया। पीड़िता के बयान के पलटने पर अदालत ने 5 फरवरी 15 को आरोपी खेमसागर यादव को दुष्कर्म के आरोप से दोष मुक्त कर दिया। अदालत ने पीड़िता द्वारा न्यायालय में दर्ज कराये गए बयान से मुकर जाने को गंभीरता से लेते हुए एडीजे जेआर बंजारा के न्यायालय ने प्रार्थिया को न्यायालय में अपने पूर्व के कथन से मुकरते हुए पुनः न्यायालय में कथन करने पर झूठा साक्ष्य प्रस्तुत करने के आरोप में आईपीसी की धारा 193 के तहत परिवाद दर्ज कराने का निर्देश दिया। अदालत के निर्देश का पालन करते हुए कुनकुरी के जेएमएफसी के न्यायालय में परिवाद दायर कर दिया है। कानून के जानकारों के मुताबिक परिवाद में पीड़िता के विरूद्व आरोप सिद्ध हो जाने पर उसे 7 साल की सश्रम कारावास के साथ जुर्माने की सजा भी हो सकती है। धारा 164 के तहत मामले की प्रार्थिया का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत दर्ज बयान न्यायालयीन अभिलेख में दर्ज होता है। बयान से मुकरने पर न्यायालय द्वारा कार्रवाई की जा सकती है मामले पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी कड़ा रूख अपनाते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया था।