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\"शिक्षकों का नैतिक पतन देश के लिए खतरा\'

7 वर्ष पहले
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विद्यालयपरिवार की ओर समाज आशा की दृष्टि से देखता है कि है कि शिक्षक उनके बच्चों का भविष्य संवार सकता है। पर वर्तमान में शिक्षकों का नैतिक पतन होना देश के बहुत बड़ा खतरा है। अभिभावक धीरे-धीरे सावधान हो रहे हैं। इसका परिणाम भी आने वाले समय में दिखेगा। यह बातें शासकीय विजयभूषण सिंह देव कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय रक्षित ने कहीं।

वे राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान द्वारा डाइट में आयोजित सेवाकालीन प्रशिक्षण में शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए भी बेहतर यही है कि वे स्वयं सावधान हो जाएं, वरना ऐसा दिन आने वाला है, जब समाज के निर्माताओं को अपना परिचय बताना भी कठिन हो जाएगा। डॉ. रक्षित ने कहा कि विज्ञान एवं गणित में बच्चों की दर्ज संख्या कम हुई है, जो देश के लिए भी गंभीर स्थिति है। आज जिनकी नियुक्ति इस जनजातीय क्षेत्र में हुई है, वे साल भर इस चिंता में है कि कैसे मेरा स्थानांनतरण हो जाए। जो शिक्षक अच्छा कार्य कर रहे हैं या करने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी शिकायत कैसे करें, इसी प्रकार की नकारात्मक उर्जा में अनेक शिक्षक का समय व्यतीत हो रहा है। उसे तनिक भी चिंता नहीं है कि कैसे हमारे विद्यार्थियों का चरित्र ऊंचा हो, कैसे ज्ञान का कौशल बढ़े और विद्यार्थी हमारा और देश का नाम रौशन करें। सकारात्मक कार्यों ओर रचनात्मक कार्यों की दिशा में शिक्षकों को आगे बढ़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि स्कूल ही बच्चों का भविष्य संवार सकता है। वर्तमान में शिक्षकों का नैतिक पतन होना देश के बहुत बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का समाज में महत्वपूर्ण स्थान है। पर कई कारणों से आज समाज में शिक्षकों की विराधाभासी छवि बन रही है। जिसे शिक्षक ही बदल सकते हैं।

प्रशिक्षण लेने पहुंचे शिक्षक।

सभा मेंं प्राचार्य विजयभूषण।