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अब सतर्क नहीं हुए तो गर्मी में जूझना पड़ेगा शहरवासियों को जल संकट से

5 वर्ष पहले
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जिले में वर्तमान में शहर से ठंड अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हुआ है और शहर के कई वार्डों में पेयजल की समस्या गहराने लगी है, वहीं गर्मी के दिनों में कुआं और तालाब के सूख जाने से पेय जल और निस्तारी जल के लिए शहरवासियों की निर्भरता नल-जल और पानी के टैंकरों पर बढ़ जाएगी, वहीं नगर पालिका के लिए समित संसाधनों से पानी की सतत् आपूर्ति बनाए रखना कठिन होता जा रहा।

नगरपालिका क्षेत्र में सामान्य दिनों में प्रति व्यक्ति 65 लीटर प्रतिदिन की आवश्यकता होती है, लेकिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी ही प्रति व्यक्ति उपलब्ध है। आपूर्ति की स्थिति मार्च माह से अधिक खराब हो जाती है, जब जल स्त्रोतों में जल का स्तर कम हो जाता है और पानी के लिए मारा मारी शुरू हो जाती है। नगरपालिका जशपुर के मुताबिक नगर के 22 वार्डों में प्रति 18 लाख लीटर पानी की खपत है, जिसमें हर दिन करीब 8 लाख लीटर की कमी होती है। लगातार बढ़ती आबादी के साथ पानी के मांग में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

सफल नहीं होते हैंडपंप- जिले के अधिकांश क्षेत्रों की तरह जिला मुख्यालय जशपुर में भी हैंडपंप अधिक कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। ग्राउंड वाटर की स्थिति खराब है। इस कारण गर्मी के शुरू होने के साथ ही हैंडपंप के हलक भी सूखने लगते हैं। पूर्व में स्थापित 16 हजार से अधिक पंपों के औचित्य पर सवाल उठने लगे हैं। जिले में लगभग 4 सौ पावर पंप स्थापित है। यहां पीएचई के द्वारा 12 हजार 235 व अन्य विभागों के द्वारा लगभग 4 हजार हेंड पंप स्थापित किए गए हैं। जिले में हैंड पंप की असफलता को लेकर लोग चिंतित तो थे लेकिन कारण पता नहीं होने के कारण लगातार बोरों की खुदाई की जाती रही है और अभी भी कई क्षेत्रों में बोर असफᆬल हो रहे हैं, लेकिन इसके कारणों पर जानकारी एकत्रित किए बिना व अनदेखी करके बोर की खुदाई की जा रही है, जिसे बाद में असफᆬल बता दिया जाता है।

प्यास बुझाने में बोर भी नाकाम
शहर में पानी की मांग की पूर्ति करने में बोरिंग भी नाकाम साबित हो रहे हैं। नपा से मिली जानकारी के मुताबिक पालिका क्षेत्र में नगर पालिका के अधीन 31 बोर हैं। इनमें से 3 बोर लंबे अर्से से खराब पड़े हुए है। पालिका के अधिकारियों के मुताबिक खराब पड़े बोर अब रिपेयरिंग होने की हालत में भी नहीं हैं। इन खराब बोर से नगर के शांति भवन, कलेक्टोरेट कांप्लेक्स के आसपास पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है।

क्षेत्र में जल आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। गर्मी के दौरान जल संकट से निबटने के लिए कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई जाएगी। हीरू राम निकुंज, अध्यक्ष, नगर पालिका जशपुर

जल आवर्धन योजना के प्रारंभ हो जाने से शहर में पेयजल की समस्या उत्पन्न नहीं हाेगी।यदि गर्मी तक योजना शुरू नहीं हो पाती है तो नगर पालिका के द्वारा टैंकर के लिए स्टीमेंट बनाया जा रहा है जिसका प्रस्ताव बना कर भेजा जाएगा। प्रवेशचंद कश्यप, मुख्य नगर पालिका अधिकारी जशपुर

संसाधन की कमी- जल आपूर्ति को लेकर शहर में हाेने वाली परेशानी के पीछे नपा में संसाधन की कमी प्रमुख कारण है। प्रति दिन 18 लाख लीटर पानी की आपूर्ति करने के लिए नपा के पास 6 पानी टंकी, 3 टैंकर है। नगर पालिका के अध्यक्ष हीरू राम ने बताया कि पानी की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए तीन टैंकर का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके साथ ही पालिका के पास मानव संसाधन की कमी भी बताई जा रही है।

मांग अधिक, आपूर्ति कम
नगर पालिका क्षेत्र जशपुर में कुल 22 वार्ड है। इनमें से कुछ वार्डों में आज भी नल से जल आपूर्ति व्यवस्था स्थापित नहीं की जा सकी है। भागलपुर, बरटोली क्षेत्र में न ही नल कनेक्शन है और न ही सतही जल व्यवस्था में कुआं, बोरिंग ही सफल है। पूरे 22 वार्ड में कुल 2266 निजी नल कनेक्शन है। वहीं सार्वजनिक नलों की संख्या रिकार्ड में 72 है। व्यवसायिक नलों की संख्या 12 व कुल 31 बोर हैं। नगरपालिका के मुताबिक यहां सार्वजनिक कुंओं की संख्या 38 हैं। पानी टंकी की संख्या नगरपालिका क्षेत्र में 6 है, वहीं दो निर्माणाधीन दो टंकी है। जिला चिकित्सालय के पास स्थित सार्वजनिक कुआं में पानी नहीं है, वहीं चीर बगीचा, पोस्ट आफिस, दरबारी टोली, भट्ठी ग्रांउड के पास स्थित कुएं सहित कई कुएं ध्वस्त हो गए। जमीनी स्तर पर देखें तो 38 में से लगभग एक दर्जन कुएं का ही अस्तित्व नजर आता है, जिसकी स्थिति भी गर्मी के दिनों में काफी खराब होती है।

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