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जीर्णोद्धार के बाद सरस्वती मंदिर में कोठी भराई रस्म

5 वर्ष पहले
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यहां के पुरानी टोली स्थित सरस्वती मंदिर में जीर्णोद्धार के बाद कोठी भराई के रस्म का आयोजन बसंत पंचमी 13 फरवरी को किया गया है। जशपुर जिले के इस पहले सरस्वती मंदिर का पुनर्निमाण का काम ओडिसा के कारीगरों द्वारा किया गया है।

शहर के लोग अपने बच्चों को इसी मंदिर में पूजा कराने के बाद मां सरस्वती का आशीर्वाद लेने के बाद स्कूल में प्रवेश लेते हैं। इस सरस्वती मंदिर का निर्माण तकरीबन 30 साल पहले किया था। तीन दशक तक यह मंदिर सरस्वती पूजा के साथ धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। समय के साथ इस मंदिर को भव्य रूप देने का बीड़ा मंदिर को संचालित करने वाली समिति नीर युवा समिति के साथ नगरवासियों ने उठाया। ओडिशा के कारीगरों की देखरेख में मां सरस्वती के भव्य मंदिर का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। 13 फरवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर इस मंदिर में सुबह 7 बजे से पूजा और सुबह 10 बजे से गुंबद के कोठी भराई की रस्म अदा की जाएगी। समिति के प्रमोद मिश्रा ने बताया कि हिंदू मान्यता के मुताबिक नवनिर्मित मंदिर के गुंबद को बंद करने से पहले इसमें धान, गेंहूं और अष्ट धातुओं से इसकी भराई की जाती है। इसके बाद ही गुंबद को बंद किया जाता है।

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