तीन साल बाद भी नहीं मिला विभाग को हैंडओवर, भवन की स्थिति हुई जर्जर
कोतबा पशु चिकित्सालय विभाग की समस्या को लेकर शासन ने यहां नए भवन निर्माण की मंजूरी दी थी। निर्माण के 3 वर्ष बाद भी विभाग को हैंडओवर नहीं मिलने से करीब 25 लाख की भवन अब जर्जर और खंडहर में तब्दील होने के कगार में हैं। भवन देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो रही है।
पशु चिकित्सालय भवन को लेकर भवन के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखे जाने तथा पूर्ण नहीं होने के कारण इसे हैंडओवर नहीं किया गया है, लेकिन ठेकेदार के अनुसार भवन का निर्माण पूर्ण होना बताया जा रहा है। जबकि भवन में नल-जल कनेक्शन तथा बिजली वायरिंग सामान्य काम चलाऊ वायरिंग कर ठेकेदार ने भवन से अपना मुंह मोड़ लिया है, वहीं भवन की गुणवत्ता को लेकर भी अनेक सवाल उठने लगे है। इधर पशुधन विभाग द्वारा पशु चिकित्सालय पुराने एवं जर्जर भवन में ही संचालन करना पड़ रहा है। काफी पुराना व जर्जर होने के कारण भवन के छत से बरसात के दिनों में पानी रिसता है। जिससे विभाग के आवश्यक दस्तावेज भीगते हैं। जहां दस्तावेज सहित दवाओं को रखने की जगह भी कम पड़ती है। जिसके कारण यहां पुराने भवन में ही संचालन कर पाना मुसीबत बन गया है। छत्तीसगढ़ शासन पशुधन विभाग की ओर से विभिन्न नस्लों के मुर्गी पालन, सुअर पालन, बकरी पालन, भेड़ पालन, सहित विभिन्न किस्म के दुधारू गायों का भी पशुपालकों को पालन कराने शासन की योजनाएं चलाई जा रही है। लेकिन पुराने व छोटे भवन में सुविधा के अभाव के कारण पशुपालक साधारण नस्लें की पशुओं का पालन कर रहे हैं।जिससे पशुपालकों को उच्च नस्ल से लाभ नहीं मिल पा रहा है। पशु चिकित्सक के डॉ. . शिवपाल पैकरा ने बताया कि नए भवन के पूरा निर्माण हो गया है। विभाग के उच्चाधिकारियों को हेंडओवर कर दिया गया है लेकिन बिल्डिंग परिसर में व्याप्त गंदगी होने के कारण शिफ्ट कराना मुश्किल है। इस विषय में विभागीय उच्च अधिकारियों को अवगत भी कराया जा चुका है।
लेकिन आज पर्यंत तक किसी प्रकार से कोई समाधान नहीं किया गया है।
हैंडओवर नहीं होने से कोतबा पशु चिकित्सालय हो गया जर्जर।