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मां सरस्वती की हुई अराधना

5 वर्ष पहले
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सरस्वती पूजा शुरू, मंच पर हो रहा आयोजन
\\\"हे शारदे मां, हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे\\\'
बालगृह में मनाई गई वसंत पंचमी
बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर अराधना की गई। शनिवार को पुरानी टोली स्थित सरस्वती मंदिर में सुबह से दर्शन और पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। वसंत पंचमी में सुबह से ही छात्र-छात्राएं पूजा की तैयारी में लगे रही व देवी सरस्वती की आराधना कर जीवन में सफलता की कामना की। सरस्वती मंदिर में सुबह से ही मां वीणा वादिनी के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।

इस मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद कोठी भराई रस्म की गई। सुबह 7 बजे से पूजा एवं उसके बाद धान, गेंहू व अष्ट धातुओं से गुंबद की भराई की गई। इसके बाद गुंबद को बंद किया गया। इसमें अधिकांश छात्र-छात्राएं थे। हाथों में पूजा की थाल सजाए सुबह से ही श्रद्धालु सरस्वती मंदिर पहुंचने लगे थे। इसके अलावा कला क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अपने-अपने वाद्य यंत्रों, कला की सामग्रियों की विधिवत पूजा की। सरस्वती मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। इसके अलावा शहर के कई स्कूलों में छात्र-छात्राओं द्वारा वसंत पंचमी कार्यक्रम का आयोजन कर विद्या देवी की अराधना की गई। इसके लिए बच्चे रंग-बिरंगे पोशाकों में सज-धजकर स्कूल पहुंचे थे। कई छात्राएं पारंपरिक रूप से साड़ी पहनकर स्कूल गईं थीं, वहां उन्होंने शिक्षकों के साथ मां शारदे की पूजा की और प्रसाद वितरण किया।

पं. मनोज रमाकांत मिश्र ने वसंत पंचमी और वसंत के महत्व को बताते हुए कहा कि वसंत पंचमी के दिन विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की पूजा अराधना की जाती है। इस अवधि में पेड़-पौधे तक अपनी पुरानी पत्तियों को त्यागकर नई कोपलों से आच्छादित दिखाई देते हैं। समूचा वातावरण पुष्पों की सुगंध और भौरों के गुंजन से भरा होता है। मधुमक्खियों की टोली पराग से शहद लेती दिखाई देती है। इसलिए इस माह को मधुमास भी कहा जाता है। मां सरस्वती की कृपा से ही विद्या, बुद्धि, वाणी और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

बच्चों ने किया विद्यारंभ

प्राचीनकाल में बच्चों को इसी दिन से ही शिक्षा देना प्रारंभ किया जाता था। यह परंपरा आज भी जीवित है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए कई लोगों ने अपने नन्हें बच्चों के हाथों में स्लेट, पेंसिल व किताब-कापियां पकड़ाकर विधि-विधान से उनका विद्यारंभ कराया। मान्यता है कि बसंत पंचमी ऐसी शुभ तिथि है, जिसमें शुभ कार्य करने के लिए कोई मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं पड़ती।

मंदिर में पूजा करने पंहुचे श्रद्धालु।

सरस्वती मंदिर में कोठी भराई का कार्यक्रम।

बच्चों को मिले खिचड़ी प्रसाद- शहर के वसंत विहार स्थित सरगम स्कूल में भी वसंत पंचमी की अराधना के बाद स्कूल के डायरेक्टर राजेंद्र गुप्ता ने बच्चों के लिए विशेष तौर पर खिचड़ी प्रसाद बनवाया था। मां सरस्वती की पूजा करने के बाद बच्चों ने एक कतार में बैठकर सामूहिक रूप से खिचड़ी प्रसाद ग्रहण किया।

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