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मानव तस्करी पर गोष्ठी, 5 कॉलेजों के 30 प्राध्यापकों ने लिया हिस्सा

7 वर्ष पहले
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शहरके शासकीय रामभजन राय एनईएस पीजी कॉलेज के आईक्यूएसी, यूजीसी समिति एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में ‘मानव तस्करी जशपुर जिले के विशेष संदर्भ में’ विषय पर जिला स्तरीय गोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी में जिले के 5 महाविद्यालयों के 30 प्राध्यापकों एनजीओ ने हिस्सा लिया।

जिसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार एवं सीजेएम अजय सिंह राजपूत ने कानूनी प्रक्रियाओं एवं प्रावधानों का विस्तार से विश्लेषण ने किया। न्यायाधीशों ने बताया कि मानव तस्करी एक संगठित अपराध है। 2013 से पहले भारतीय दंड विधान में मानव तस्करी के लिए कोई निश्चित सजा नहीं थी। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतीश देशपांडे ने इस संगोष्ठी को महाविद्यालय द्वारा महामारी बन चुके मानव तस्करी की समस्या की जड़ तक जाने और इसके रोकथाम के उपायों की समीक्षा करने की दिशा में एक सच्चा प्रयास बताया। उन्होंने गोष्ठी के निष्कर्षों को शासन, प्रशासन और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं तक पहुंचाने का संकल्प लिया। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास कल्याण विभाग टीके जटवार ने शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न परियोजनाओं और कानूनी प्रक्रियागत सहायताओं की चर्चा की।

स्वयंसेवी संस्था चाइल्ड लाइन के डायरेक्टर जीपी धीवर ने बाल तस्करी और पुनर्वास में संस्था चाइल्ड लाइन द्वारा किए जा रहे कार्याे और उसमें आने वाली समस्याओं के बारे में बताया। प्राध्यापक श्रीमती वंदना पाठक एवं अनुपमा प्रधान ने मानव तस्करी रोकने के लिए विभिन्न प्रयासों की चर्चा की। संगोष्ठी के दूसरे सत्र में महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. जय कुमार रंजन ने मानव तस्करी के कारणों और इसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों की चर्चा की। सहायक प्राध्यापक शांतनु घोष ने मानव तस्करी को एक संगठित व्यवसाय का दर्जा देते हुए पुनर्वास और पीडितों को मुख्य धारा में लौटाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि पीडितों के पुनर्वास के लिए कार्ययोजना बनाने की जरूरत है।

पुनर्वास के लिए करने होंगे प्रयास

मानवाधिकारों का हनन है

जिले में बीते कई सालों से इस विषय में कार्य करने वाली स्वयंसेवी सेवती पन्ना ने जिले में इस समस्या की भयावहता को विस्तार से बताया। सहायक प्राध्यापक डॉ. विनय कुमार तिवारी ने इस समस्या के मानव वैज्ञानिक प