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जशपुर की लीची का स्वाद अब बस्तर के लोग लेंगे
अबबस्तर के लोग भी यहां की लीची का स्वाद बस्तर में ही ले सकेंगे। यहां से लीची के ढाई हजार पौधे दंतेवाड़ा भेजे गए हैं। बीते साल दंतेवाड़ा जिला प्रशासन की मांग के बाद उद्यान विभाग ने करमीटिकरा स्थित सरकारी नर्सरी में लीची के पौधे तैयार कराए थे। जिले के बगीचा, फरसाबहार और पत्थलगांव विकासखंड के गांवों की रसभरी लीची की मिठास अब दूर-दूर तक पहुंच गई है।
एक दशक से उद्यान विभाग ने सघन फलोद्यान योजना के तहत पत्थलगांव विकासखंड में दर्जन भर गांव के 50 से अधिक किसानों की बंजर भूमि के अलावा उनके खेतों की मेड़ पर विभिन्न प्रजाति के आम, अमरूद, काजू, कटहल और लीची के पौधे रोप कर उन्हें अतिरिक्त आय के लिए प्रोत्साहित किया था। इन किसानों की खुशहाली को देख कर अन्य बड़े किसानों ने भी अपनी बंजर भूमि में फलदार पौधों से हरियाली फैलाई है। बस्तर क्षेत्र में रहने वाले यहां के शासकीय कर्मियों द्वारा जशपुरिहा लीची के पौधे अपने साथ ले जाकर वहां लगाने के बाद इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। बस्तर में रहने वाले लोगों को यहां की लीची खूब रास आने लगी है। बीते वर्ष दंतेवाड़ा उद्यान विभाग से पत्थलगांव में लीची के 2500 पौधों की मांग आई थी। उद्यान विभाग को इन पौधों का भुगतान मिल जाने के बाद अगस्त और सितंबर माह में यहां से लीची के पौधे दंतेवाड़ा भेजे गए हैं।
पौधे बना कर ले सकते हैं फायदा
जशपुरमें लीची के खेती करने वाले बड़ीग के माध्यम से प्रति पौधा 35 रुपए से लेकर 250 रुपए तक का एक पौधा बिक्री करते हैं। एक पेड़ में 1 क्विंटल से लेकर 6 क्विंटल तक फल लेकर प्रति पौधा प्रतिवर्ष 10 हजार से लेकर 30 हजार रुपए तक कमाई की जा सकती है। कई लोग इसे बगान लगा कर इसकी खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रहे हैं।अब यहां के लीची के पौधे की मांग भी बढ़ गई है। किसान छोटे से जगह में इसे लगा कर बेहतरीन कमाई का जरिया बना सकते हैं।
लीची की उपज के लिए बस्तर में अच्छी संभावना
उद्यान अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया ने बताया कि पत्थलगांव में करमीटिकरा की शासकीय नर्सरी से बस्तर भेजे गए लीची के पौधों से 3-4 साल में फसल मिलने लगेगी। जशपुर जिले की तरह बस्तर की भी अच्छी जलवायु के चलते वहां पर लीची के उपज की काफी अच्छी संभावना है। श्री भदौरिया ने बताया कि पत्थलगांव में उद्यान विभाग की नर्सरी में आम, लीची, काजू, कटहल आदि फलदार पौधों का लगातार र