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हर साल बढ़ रहे अंधत्व के मरीज

7 वर्ष पहले
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जिलेके सैकड़ों मोतियाबिंद मरीजों का समय पर ऑपरेशन नहीं होने से उनपर अंधत्व का खतरा मंडरा रहा है। मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर बंद होने से बड़ी संख्या में मोतियाबिंद के मरीज भगवान भरोसे हैं। पहले जहां अस्पतालों और शिविरों के माध्यम से जिले में 2 हजार से अधिक ऑपरेशन हो रहे थे, अब गिनती के ही ऑपरेशन हो रहे हैं। जिला अस्पताल की नेत्र सर्जन के छुट्टी में रहने के कारण करीब 7 माह से यहां मोतियाबिंद का एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ है। 2011-12 में प्रदेश के दुर्ग, बालौद बागबहरा जिले में मोतियाबिंद ऑपरेशन के कारण कई मरीजों की आंख की रोशनी चल गई थी। इसके बाद से शिविरों के माध्यम से मोतियाबिंद ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। इससे जिले के मोतियाबिंद मरीजों के सामने परेशानी बढ़ गई है। मोतियाबिंद को अंधत्व का प्रमुख कारण माना जाता है। जशपुर जिले में केवल दो ही नेत्र सर्जन हैं। उनमें से एक जशपुर जिला अस्पताल में पदस्थ हैं, जबकि एक पत्थलगांव में है। गरीब तबके के लोग आर्थिक कठिनाइयों के कारण मोतियाबिंद की जांच और इलाज बाहर के अस्पतालों में नहीं करा सकते। वे इसके लिए पूरी तरह सरकार के शिविरों सरकारी अस्पतालों के भरोसे ही रहते हैं। पर शिविर बंद होने बीते करीब सात माह से जिला अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन नहीं होने से ऐसे मरीजों में अंधत्व की समस्या सकती है। जिले में पत्थलगांव, जशपुर जिला अस्पताल, हॉलीक्रास अस्पताल कुनकुरी में मोतियाबिंद के ऑपरेशन होते हैं। पहले इन अस्पतालों में विभिन्न समाजसेवी संगठनों द्वारा शिविर आयोजित कर ऑपरेशन कराए जाते थे। पर इस साल अभी तक मोतियाबिंद के मात्र 39 ऑपरेशन किए गए हैं। जिनमें से 16 आपरेशन रायगढ़ में लाइफलाइन एक्सप्रेस में किए गए। जबकि 23 ऑपरेशन एनजीओ के माध्यम से हुए।

सालभर में चली जाती है रोशनी-जिला अंधत्वनिवारण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. जीजे लकड़ा ने बताया कि मोतियाबिंद के मरीजों का सही समय पर ऑपरेशन नहीं होने पर उनके आंखों की रोशनी जा सकती है। यह मरीज की कंडिशन पर निर्भर होता है कि उसमें अंधत्व की समस्या कब आएगी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन नहीं होने से औसतन साल भर में मरीज अंधत्व का शिकार हो सकता है।

ऑपरेशन के लिए दलाल सक्रिय

बतायाजाता है कि लंबे समय से यहां मोतियाबिंद का शिविर नहीं लगने एवं ऑपरेशन नहीं होने के कारण गांव-गांव में दलाल सक्रिय हो गए हैं। वे स्मार्