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विद्यार्थियों के लिए घातक हो सकता है अपेक्षाओं का बोझ

6 वर्ष पहले
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परीक्षाको लेकर अभिभावकों की अपेक्षाएं विद्यार्थियों के लिए घातक हो सकती हैं। पैरेंट्स बच्चों पर अपेक्षाओं का बोझ डालें। परीक्षा की तैयारी के लिए मनोविज्ञान के जानकारों ने जरूरी टिप्स अभिभावक विद्यार्थियों को दिए हैं।

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10 वीं और 12 वीं बोर्ड परीक्षाओं की तिथियां घोषित कर दी है। परीक्षाओं के शुरू होने में अब करीब 10 दिन का ही समय बच गया है। जैसे-जैसे परीक्षा की तिथियां नजदीक रहीं हैं, विद्यार्थियों की धड़कनें भी बढ़ रहीं हैं। वे अपनी तरफ से परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए पढ़ाई में जुट गए हैं। इस कार्य में यथासंभव अभिभावक भी बच्चों की मदद कर रहें हैं। वर्तमान प्रतिस्पर्धा के समय में हर अभिभावकों की अपेक्षा रहती है कि उनकी संतान परीक्षा अच्छे से अच्छा नंबर लाए। इसी अपेक्षा में वे जाने-अनजाने बच्चों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव और तनाव डाल देते हैं। बच्चे के दिमाग में भी अपने माता-पिता की अपेक्षा पूरी करने के लिए अतिरिक्त मानसिक तनाव जाता है। जिसके चलते उनकी पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाती

परीक्षा परिणाम अपेक्षित नहीं रहने से विद्यार्थियों के मन में निराशा की भावना जाती है। कई बार परीक्षा में असफल होने या अभिभावकों की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरने पर विद्यार्थी गलत कदम भी उठा लेते हैं। परीक्षाओं में केवल एक माह ही बचा है। अब समय है कि विद्यार्थी यह अच्छे तरीके से जान लें कि परीक्षाओं को लेकर तैयारी कैसे की जाए। साथ ही अभिभावक भी यह समझें की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों के साथ उनका व्यवहार कैसा हो। जिससे बच्चे प्रसन्न मन से पढ़ाई करें और उन पर अतिरिक्त मानसिक तनाव रहे।

साइकोथैरेपिस्ट श्री सैकिया ने विद्यार्थियों को भी कई महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं। विद्यार्थियों के लिए यह समय कुछ नया पढऩे या सीखने का नहीं है। जो वे पढ़ चुके हैं उसके रिविजन में जुट जाएं। विद्यार्थी उन विषयों और पाठ्यक्रम को पहचानने की कोशिश करेें, जिनमें उन्हें कठिनाई आती है। इसके बाद शिक्षक या विषय के जानकार अन्य लोगों से मिलकर उन कठिनाइयों को दूर करें। परीक्षा को लेकर माता-पिता अभिभावक चिंतित रहते हैं, विद्यार्थी उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे परीक्षा में बेहतर करेंगे। विद्यार्थी अनावश्यक गतिविधियों में समय बर्बाद करें। इससे अभिभावक और अधिक चिंतित होंगे। साथ ही विषयों के रिविजन के लिए विद्यार्थियों के पास भी कम समय बचेगा, जो उन्हें अतिरिक्त तनाव देगा। विद्यार्थी अपने आप से यह कहें यह कोई मेटर नहीं है, मैं प्रसन्न और तनाव मुक्त रहूंगा। ऐसा अपने आप को याद कराना विद्यार्थियों के लिए बहुत जरूरी है कि वे तनाव मुक्त और प्रसन्न रहेंगे। अगर परीक्षा परिणाम अच्छा रहता है तो यह खुशी की बात है। अगर रिजल्ट अपेक्षा के अनुसार नहीं रहा तो यह मानें की उनके लिए दुनिया खत्म नहीं हुई है। विद्यार्थी रोज ध्यान करें, भले ही थोड़ी ही देर के लिए। इन टिप्स को अपनाकर विद्यार्थी अतिरिक्त मानसिक तनाव से दूर रहकर परीक्षा की अच्छी तैयारी कर सकते हैं।

साइकोथैरेपिस्ट पीपी सैकिया ने कहा कि बच्चों पर पढ़ाई के लिए दबाव बनाना बंद करें। यह परीक्षाओं का समय है। पढ़ाई के लिए दबाव बनाना वास्तव में बच्चों पर और अधिक तनाव डालना है। अभिभावक अपने बच्चों को यह जरूर कहें हम जानते हैं कि तुम परीक्षा में अच्छी परफारमेंस के लिए तैयार हो। अपनी तरफ से अच्छा करो। तुम्हारा जैसा भी परीक्षा परिणाम आएगा, हमें मंजूर है। बच्चों के सामने चिंतित चेहरा रखें। अभिभावकों का चिंतित चेहरा देखकर बच्चे और अधिक तनाव अनुभव करेंगे। इससे जो वे याद किए हैं और पढ़े हैं, वह भूलने लगेंगे। परीक्षा की तैयारी के दौरान बच्चों को पेन सेट या अन्य गिफ्ट लाकर दें, जो उनके लिए जरूरी है। यह बच्चों के तनाव को हल्का करने में सहायक होगा। अगर संभव हो तो परिवार सहित एक दिन घर से कहीं बाहर पिकनिक, रेस्टोरेंट या होटल आदि में जाएं। यह भी बच्चों के तनाव को कुछ कम करेगा। परीक्षा के बारे में चर्चा करना बंद करें। बच्चे यह अच्छी तरह जानते हैं कि परीक्षा नजदीक है और पैरेंट्स उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रहें हैं।

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