घर के बेटी लछमी बचावा
मर भारत के पहिचान सभ्यता अव संसकीरती ले हावय हमर देस के माटी के सोंध-सोंध महक ले पूरा बिस्व हर गमकत हावय, हमर धरा के पहिचान ही हमर आचरन, बड़े मन के आदर से जाने बर जाथे, राम सीता के संग लछमन घलो गईस अपन भई-भौजी के खातिर प|ि उर्मीला अयोघ्या छोड़ के 14 बछर बन रहीन, अपन भौजी के आगू मुड़ तरी करे रहय, वैसनहे महाभारत अपन मां के आगया मान के पांचो पांडुमन द्रौपदी अपनायीन लेकिन कुछ साल ले परिस्थीती हर बदलगे हावय, जहां नारी के सम्मान बर हमर चिन्हारी हे। यदि इतिहास देखन नारी के रूप मं लक्ष्मीबाई पूरा अंग्रेज मन बर भारी रहीन, दुरगाबती, इंदिरागांधी, सरोजनीनायडु, छत्तीसगढ़ के मिनीमाता आदि महिला होत भी देस बर अड़बड़ काम करे हावय, आज भी नारी के ससक्त भूमिका हावय जहां हम नारी सिक्छा जोर देबत हावन, जहां हम तरक्की के बात करत हावन उहां नारी के परती अनयाय होवत हावय, मय 16 दिसम्बर 12 के घटना याद करावत हांवव, दामिनी के अस्मत छीन के निरदयता से हतिया कर देहे गईस, आने एक कनिया के अस्मत लूठ के वोला जला के मार डारीन, अभी बरतमान नाबालिग लड़की के अपहरन करिके ओकर अस्मत लूठ के कुटी-कुठी काट डारिन नबजात कनिया घलो अपन सिकार बनाबत हावय, अपन ले कई गुना उमर के आदमी करा गरीबी भूखमरी के कारन घर के माई पीला पोसे खातिर बिहाव करना परत हावय, कभू एसीड डारके नोनी के जिनगी खराब करत हावय कभू असमत लूट के ओकर मन अव तन दूनों मार दारत हाबय, कैसे बिडंबना हावय कि हर दुख माई लोगन सहे बर परत हाबय, पहिरी के राक्छस के सिंग रहय तो वो हर चिनहा जाये लेकिन अभी के राक्छस ले हमर महिला समाज कैसे बाचय, कब वो दिन आही जम्मो नोनी अव माई लोगन निर्भीक होके आवाजाही कर सकही, रावनजईसे राक्छस हर केबल अपन कुटुंब के कलियान बर माता के अपहरन करिस, आज आए दिन पेपर पढ़थन कि नबजात कनिया लाबारिस छोड़ दिए हाबय, कचरा फेंक देबत हे, कभू पड़थन कि जिंदा जमीन गाड़दीन हाबय, कभू कुत्ता के निबाला बनत हाबय कभू सभ्य समाज के हवस के सिकार बनत हावय, हमन नवरातरी नौ दिन दुरगा दाई के पूजा-उपास करथन नव कनिया नवा दिन देबी मान परसाद खवाथन हमन हमेसा कनिया देबी रूप काबर नई देखन, मनखे घिनित कृतय कब छोड़ ही, कब कनिया सम्मान पियार से देखही जहां प्रधानमंत्री देस के सफाई बर जोर देबत हावय मय कहत हौं कि हमर देस के समस्या बिकराल समस्या हावय जन-जन प्रनबध्द हो काज आना चाही, जतका एंजियो हाव