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नगर के धर्मशालाओं का व्यावसायिक इस्तेमाल
धर्मशालाओं कें व्यवसायिक उपयोग के मामले में खरसिया नगर भी पीछे नही है। नगर की अग्रसेन धर्मशाला एवं कन्या विवाह भवन का भी जमकर व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। दोनों धर्मशालाओं में बनी हुई दुकानों को किराये पर उठाकर व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रस्टों द्वारा धर्म के नाम पर बनाई गई धर्मशालाओं को धन लाभ अर्जित करने का जरिया बना दिया गया है।
धर्मशालाओं का किराया इतना महंगा है कि गरीब और मध्यमवर्ग के लोग अपने वैवाहिक एवं मांगलिक कार्यक्रम के लिए इन धर्मशालाओं का उपयोग करने की सोच भी नही सकते। कलेक्टर श्री बंसल ने रायगढ में धर्मशाला संचालकों के द्वारा धर्मशालाओं के व्यवसायिक रुप देकर भारी भरकम किराये पर दुकान उठाने को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए धर्मशाला संचालकों की बैठक में कहा था कि धर्मशाला को धर्मशाला की तरह चलाये और इसका व्यवसायिक उपयोग करें। खरसिया नगर भी धर्मशालाओं के व्यवसायिक इस्तेमाल में पीछे नही है। अग्रसेन जनकल्याण ट्रस्ट द्वारा संचालिक अग्रसेन भवन एवं कन्या भवन धर्मशाला में दुकानों को ट्रस्ट द्वारा भारी भरकम किराये पर उठाया गया है। साथ ही धर्मशालाओं को होटलों की तर्ज पर भारी किराये पर देने की शिकायते भी आम है। वहीं स्थानीय लोगों को वैवाहिक एवं अन्य कार्य के लिए सस्ते भवन उपलब्ध नही हो पा रहे है और लोग अपनी जेब ढीली करने पर मजबूर हो रहे हैं। धर्मशालाओं का निर्माण समाज के लोगों को सुविधा देने की उद्देश्य से कराया गया है इसका व्यवसायिक उपयोग नही किया जाना चाहिए इसके बावजूद धर्मशालाओं संचालित करने वाले ट्रस्ट केवल उनमें दुकान बनाकर किराये पर उठा रखे हैं बल्कि कई धर्मशालाओं में होटलों की तर्ज पर कमरों का महंगा किराया लिया जा रहा है। जिसमें जानकी धर्मशाला का नाम सबसे चर्चित है। यहां एसी कमरे का किराया होटल की तरह 500-600 रुपए वसूल किया जा रहा है। बाहर से आने वाले लोग रिययती दर पर आवास सुविधा मिलने की आस लेकर धर्मशालाओं की ओर आते हैं पर उन्हें उस समय तगडा झटका लगता है जब वे धर्मशालाओं के कमरे का किराया एक होटल के मुकाबले पाते हैं।
नगर के प्रबुध्द लोगों ने जिलाध्यक्ष से मांग की है कि वे रायगढ शहर की तरह खरसिया में भी धर्मशालाओं के व्यवसायीकरण पर हस्तक्षेप करें और लोगों को राहत पहुंचाएं।
धर्मशाला में चल रहा दवाई दुकान।
भारी भरकम किराया, दुकानें बन