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सिर्फ एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के भरोसे जिला

7 वर्ष पहले
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टायफाइड के मरीज बढ़े

जिलेके लगभग सभी अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। जिले में 5 शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं पर कहीं भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि पूरे कोरिया जिले में एकमात्र स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कलावती पटेल हैं। जो जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहां जिन लोगों के पास स्मार्ट कार्ड है उसका भी वे लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। स्थिति यह है कि महिला मरीजों को अपने जेवर और जमीन तक बेचकर इलाज कराना पड़ रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि क्षेत्र के शासकीय अस्पतालों में सामान्य प्रसव ही कराए जाते हैं। सिजेरियन ऑपरेशन वाले मामले में अस्पताल प्रबंधन हाथ खड़ा कर देता है। तब लोगों को निजी अस्पतालों का रूख करना ही पड़ता है।

क्षेत्र का इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रदेश के मुखिया ने कोरिया जिले की तीनों विधानसभाओं को गोद लेने की बात कही थी। जिस जिले को प्रदेश के मुखिया ने गोद ले रखा हो, जिस जिले के प्रभारी मंत्री स्वास्थ्य मंत्री हों उस जिले में डॉक्टरों के अभाव स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से मरीज तिल-तिल कर मरने के लिए विवश हैं। स्मार्टकार्ड होने के बाद भी उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

अस्पतालों में संसाधनों का अभाव बना हुआ है सबसे अधिक परेशानी महिला मरीजों को हो रही है। उन्हें अपने जेवर, जमीन तक बेचकर इलाज कराना पड़ रहा है। क्योंकि क्षेत्र के शासकीय अस्पतालों में सामान्य प्रसव ही कराए जाते हैं। सिजेरियन ऑपरेशन वाले मामले में अस्पताल प्रबंधन हाथ खड़ा कर देता है। तब लोगों को निजी अस्पतालों का रूख करना ही पड़ता है। क्षेत्र के लोगों ने संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट करते हुए व्यवस्था सुधारने की मांग की है।

मरीजों के लिए नहीं है पर्याप्त बिस्तर।

महिलाओं को अिधक परेशानी

स्त्री रोग विशेषज्ञ के अभाव में गरीब गर्भवती महिलाएं जिनका सामान्य प्रसव नहीं हो पाता, उनकी जान पर बन आती है। थक-हारकर कर्ज लेकर, गहने जमीन बेचकर निजी नर्सिंग होम में उन्हें अपनी डिलेवरी करानी पड़ रही है। जननी-सुरक्षा के नाम पर राज्य सरकार हजार-पंद्रह सौ रुपए देकर एक तरह से जले पर नमक छिड़कने का ही काम कर रही है। समूचे प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की दुहाई देने वाल