पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • रेलवे की फर्स्ट एड में सिर्फ पैरासिटामॉल

रेलवे की फर्स्ट एड में सिर्फ पैरासिटामॉल

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर संवाददाता | बैकुंठपुर

रेलवे में यात्रा करने वाले यात्रियों का तब मुश्किल होती है जब अचानक यात्री बीमार पड़ते हैं और समय पर इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। उस स्थिति में मरीज की जान पर बन पड़ती है। बात अगर कोरिया जिले के रेलवे स्टेशन के आसपास की बात करें,तो यहां परेशानी कम नही है।

कोरिया जिले के अंतर्गत 9 स्टेशन आते हैं। इनमें से बैकुंठपुर, चिरमिरी, मनेंद्रगढ़ तीन रेलवे स्टेशन नगरीय क्षेत्र में आते हैं पर यहां भी इमरजेंसी में मरीज को उपचार के लिए देने के लिए कम से कम एक घंटे का समय लग जाता है। जानकारी के अनुसार दो साल पहले बौरीडांड में एक मरीज को हार्ट अटैक आया था। उसे समय पर इलाज नही मिल पाने के कारण उसकी मौत हो गई थी। हालांकि स्थानीय रेलवे प्रशासन को इसकी जानकारी मिलने के बाद चरचा एसईसीएल हाॅस्पिटल से डाक्टर को बुलाया गया था। पर ट्रेन के बौरीडांड से चरचा पहुंचने में लगभग 1 घंटे का समय लग जाता है। एक घंटे के अंतराल में मरीज की मौत हो गई। इसलिए यदि इस क्षेत्र में रेलवे में यात्रा करना है तो अपने साथ दवाइयां लेकर यात्रा करनी होगी।

अापातकालीन अधिकांश नंबर आउटडेटेड हो गए हैं
चिरमिरी और मनेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन नगर से दूर स्थित है। पर मुसीबत यहां भी कम नहीं है। अापातकालीन अधिकांश नंबर आउटडेटेड हो गए हैं। वही रेलवे में मेडिकल से संबंधित कोई खास सुविधा उपलब्ध नही कराई गई है।

रेलवे स्टेशन से बाजार तीन किलोमीटर दूर
पटना के कटोरा रेलवे स्टेशन से तो पटना बाजार लगभग तीन किलोमीटर दूर है। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण यहां मेडिकल स्टोर से दवा लेने के लिए तीन किलोमीटर की दूरी तय करना सफर के वक्त परेशानी का सबब बन जाता है।

यात्रियों को इलाज के लिए बिलासपुर रेफर करते हैं
कोरिया जिले के चिरमिरी, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर सहित जिला चिकित्सालय से हर रोज मरीजों को इलाज के लिए बिलासपुर, रायपुर के लिए रेफर किया जाता है। यात्रियों की तबीयत अगर अचानक खराब हुई तो परेशानी बढ़ जाती है।

एक यात्री ने बताया सहायता नहीं मिल पाई
चिरमिरी निवासी एडवोकेट ऋषभ कुमार जैन ने बताया कि पिछले दिनों वे चिरमिरी से सागर के लिए सफर करने घर से निकले और अनूपपुर अमलई के बीच में उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद तत्काल अनूपपुर निजी डाॅक्टर से प्राथमिक उपचार लेने के बाद वापस चिरमिरी लौटे। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए बड़े रेलवे स्टेशन में मेडिकल की कोई सुविधा नहीं होना यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण है। उन दिनों के अपने अनुभव के बारे में उन्होंने कहा कि रेलवे में सफर करने के दौरान रेलवे स्टेशन में कुछ आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां होनी चाहिए। इससे तत्काल मरीज को राहत दी

जा सके।

नगर और बैकुंठपुर रोड से मुख्य बाजार और हाॅस्पिटल की दूरी क्रमशः 9 और 20 किलोमीटर है। बैकुंठपुर रोड स्थित रेलवे स्टेशन में एक प्राथमिक उपचार की पेटी है। मुख्य स्टेशन प्रबंधक ने बताया कि जनवरी महीने में एक बार इसमें रखी दवा का उपयोग किया गया था। उसके बाद सील कर दिया गया। पेटी में प्राथमिक उपचार के लिए पैरासिटामल की गोली और मल्हम पटटी रखने की बात बताई।

दवा की पेटी सील कर दी गई है
खबरें और भी हैं...