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चार विकासखंड में पानी का स्तर गिरा, सैकड़ों तालाब सूखे पड़े, गर्मी में राहत पाने नहीं है उपाय
भास्कर संवाददाता | बैकुंठपुर
जिले के पांच विकास खंड में सोनहत को छोड़कर सभी चार में पेयजल, निस्तारी पानी की किल्लत होने की आशंका है। पानी की सबसे अधिक परेशानी खड़गवां विकासखंड में होगी। क्योंकि सबसे कम बारिश इसी विकासखंड में दर्ज की गई है। अभी तक पेयजल से निपटने कोई ठोस कदम प्रशासन ने नहीं उठाया है।
बारिश कम होने के कारण जहां किसान परेशान हैं। वहीं पीने के पानी, सिंचाई सहित मवेशियों के पीने के लिए भी पानी की समस्या सामने आ रही है। खड़गवां विकासखंड के 64 ग्राम पंचायतोंे की हालत एक जैसी है। सैकड़ों तालाब सूखे हुए हैं। गौरतलब है कि महामाया मंदिर के पीछे एक तालाब था। जहां पर कमल के फूल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते थे। अब वहां तालाब पूरी तरह मैदान में बदल गया है।
हर साल गिर रहा है जलस्तर
गौरतलब है कि साल दर साल भूमि का जल स्तर नीचे जा रहा है। एेसा होने के पीछे जानकार बताते है कि लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में बोर कराया जा रहा है। इसके साथ ही पानी का दोहन भी जमकर किया जा रहा है। अंधाधुंध बोर के कारण भू-जल स्तर नीचे चला गया है। बोर कराने में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ नगरीय क्षेत्र भी पीछे नहीं है। हालांकि इन दिनों जिला प्रशासन द्वारा बोर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिला प्रशासन के इस निर्णय की देरी से अब भू-जल काफी नीचे चला गया है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप भी ड्राई हो रहे हैं। सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि जिले के पांचों विकासखंड में 11064 हैंडपंप हैं, इनमें से 10938 हैंडपंप चालू हैं। सिर्फ 126 हैंडपंप ही बंद बताया जा रहा है। जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल अलग है।
1967 में बनी थी ऐसी स्थिति
सन 1967 में एेसी स्थिति बनी थी। जब क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा था। एेसा यहां के कुछ बुजूर्ग जानकार बताते हैं। उन दिनों इतनी सुविधाएं नहीं थी। आज लगभग 48 साल बाद फिर वैसी ही स्थिति बन गई है।
खड़गवां के ग्राम पंचायत में हैं सर्वाधिक सूखा
कोड़ा, मेंड्रा, धवलपुर, पैनारी, देवाडांड, सलका, फुनगा, बेलबहरा, कटकोना, जरोंधा, सकड़ा, संेधा, पीपरबहरा, उधनापुर, आमाडांड, तामडांड ग्राम पंचायत के कई गांव के ग्रामीणों को पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जिले में 307 स्टाॅप डेम, 67 सिंचाई परियोजनाएं हैं। इनमें से आधे स्टाॅप डेम के गेट डैमेज हैं या चोरी हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खराब पड़े डेम के गेट को बारिश शुरू होने के पहले विभाग बनवा देता तो आज एेसी स्थिति नहीं बनती।
11064 हैंडपंप बंद 126 हैं ड्राई
गौरतलब है कि जिले में 11064 हैंडपंप हैं। जिनमें से 126 हैंडपंप ड्राई है। जबकि स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। 126 से अधिक हैंडपंप सिर्फ ब्लाॅक बैकुंठपुर में ही बंद पड़े हैं या इनमें पीने योग्य पानी नहीं निकल रहा है। अगर पीएचई विभाग के आंकड़े पर नजर डाले तो जिले में सबकुछ ठीक है। पेयजल की दिक्कत कहीं भी नहीं है। पेयजल की समस्या विभाग ने कागजों में दुरुस्त कर ली है। बैकुंठपुर में 2773 हैंडपंप में 15 बंद, सोनहत में 1772 हैंडपंप में 16 बंद, मनेंद्रगढ़ में 2151 हैंडपंप में 11 बंद, खड़गवां में 2272 हैंडपंप में 11 बंद, भरतपुर में 2096 हैंडपंप में 25 हैंडपंप बंद बताया गया है। आंकड़ों पर नजर डाले तो खड़गवां में सबसे कम 11 हैंडपपं बंद हैं। जबकि 44 गांव सबसे अधिक सूखे की स्थिति में हैं।
डाॅ.रामचंद्र सिंहदेव ने दिए सुझाव
जिले में पीने के पानी को लेकर पहले ही प्रदेश के पहले वित्त मंत्री डॉ. रामचंद्र सिंहदेव ने चिंता व्यक्त की और सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिले की नल-जल योजना को दुरुस्त करवाया जाए। साथ ही जिन ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर बहुत नीचे चला गया है। वहां के लिए जिला प्रशासन 50 टैंकर की व्यवस्था करे। ताकि उन ग्रामीणों तक पीने का पानी पहंुचाया जा सके।
चिरमिरी में गर्मी के पहले ही होने लगी पानी की किल्लत।
जिले में औसत 2 से 3 मीटर नीचे गया जल स्तर
जिले के पांच ब्लाॅक में चार का जल स्तर 18 से 20 मीटर नीचे चला गया है। जबकि खड़गवां ब्लाॅक में 22 से 23 मीटर तक भू-जल स्तर नीचे चला गया है। वहीं पीएचई विभाग द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार खड़गवां ब्लाॅक के सबसे अधिक प्रभावित 44 गांव पीने के पानी के लिए चिंहित किया गया है।
खड़गवां चनवारीडांड मंदिर के पीछे स्थित तालाब मैदान में तब्दील। अमरपुर के डेम में गेट नही होने के कारण बारिश का पानी बह गया।
खड़गवां विकासखंड के 64 ग्राम पंचायतोंे की हालत एक जैसी, पानी के लिए मवेशियों को भटकना पड़ रहा है
जिले के तीन नगरीय क्षेत्र में पेयजल की स्थिति
मनेंद्रगढ़ में हसदेव नदी से पानी सप्लाई किया जाता है। इस साल कम बारिश होने से नदी सूखे की स्थिति में है। क्षेत्र में पानी की दिक्कत मार्च, अप्रैल व मई में होती है। इसके समाधान के लिए बरकेला बांध से पानी खरीदा जाता है। बांध से छोड़े गए पानी के भंडारण के लिए अस्थाई बांध भी बनाया जाता है। चिरमिरी के एक लाख की आबादी सरभोका स्थित आरुणि जलाशय पर निर्भर है। इस डेम से 6 महीने तक क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है। यहां सप्लाई सिस्टम में कई तकनीकी गड़बड़ियां हैं। इससे मार्च से मई के गर्मी के दिनो में सबसे अधिक कोरिया काॅलरी,गेल्हापानी, डोमनहिल, गोदरीपारा, छोटा बाजार के लोग पानी के लिए परेशान होेते हैं। इसके साथ यहां प्राकृतिक जलस्त्रोत तुर्रा पर निगम के 40 वार्ड के लोग निर्भर रहते हैं। पीएचई की मुख्य पाइप लाइन से ही कई घरों में अवैध कनेक्शन लिया है। इससे आगे पानी सप्लाई नहीं होता। चिरमिरी में सप्लाई सिस्टम को ठीक कर दिया गया तो सभी वार्डों तक पानी की सप्लाई संभव है। इसके लिए पीएचई व निगम के पाइप से अवैध कनेक्शन काटने होंगे। वहीं लिकेज की समस्या दूर करना होगा। बैकुंठपुर में झुमका व गेज डेम से पानी की सप्लाई की जाती है। यहां पानी की दिक्कत नहीं है।
परेशानी दूर करने का प्रयास
विकास खंड खड़गवां में सूखे से निपटने क्या तैयारी है?
पीएचई सब इंजीनियर सोनी ने बताया कि खड़गवां में पानी की दिक्कत 44 गांव मंे है। उसे चिंहित कर उपाए किया जा रहा है।
क्या उपाए किए जा रहे है?
जिन ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल स्तर नीचे चला गया है। वहां के हैंडपंप में अतिरिक्त पाइप लगाकर हैंडपंप को चालू किया जा रहा है। साथ ही ढबरी और नाला के पानी को रोकने का काम किया जा रहा है।
गांव के अधिकांश हैंडपंप में दूषित पानी आता है। इसके लिए विभाग क्या कर रहा है?
कई गांव में फिल्टर प्लांट लगाया गया है।
कई फिल्टर प्लांट खराब पडे़ है?
प्लांट लगाने के बाद उसके मेंटेनेंश के बारे में ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों को जानकारी दे दी जाती है। लेकिन समय पर फिल्टर की सफाई नहीं करने के कारण ग्रामीण स्वयं ही हैंडपंप का कलेक्शन डायरेक्ट कर लेते हैं।