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मौत मांगी थी अब संवर गई जिंदगी

6 वर्ष पहले
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वहजीना नहीं चाहती थी। दुनिया के सबसे भयंकर बीमारियों में से एक स्किन कैंसर ने उसे घेर लिया है। उसे मदद करने के लिए आगे आने वाले सरकारी अफसरों से उसने पैसों की बजाए मौत की गुहार लगा दी। तभी उसे आशा की किरण दिखी और जीने की राह मिल गई। लोरमी के कन्या शाला की आठवीं की छात्रा शिथलेश राजपूत के जीवन की कहानी ऐसी ही है।

दो साल पहले उसे पता चला कि उसे स्किन कैंसर हो गया है। भयंकर खुजली दर्द से परेशान शिथलेश का जीना दुर्भर हो गया। पीड़ा इतनी कि वह भगवान से मौत मांगने लगी। यहां तक कि एक दिन उसे एसडीएम तूलिका प्रजापति ने सरकारी तौर पर आर्थिक मदद करनी चाही तो उसने कहा कि सर, पैसे नहीं चाहिए। इससे कुछ नहीं हो सकेगा। हो सके तो मुझे इच्छामृत्यु की अनुमति दिला दें। शिथलेश की ऐसी गुहार से एसडीएम ब्लाक की रिसोर्स पर्सन लक्ष्मी चौधरी को हिला कर रख दिया। फिर उन्होंने राजीव गांधी शिक्षा मिशन की मदद से छात्रा का इलाज कराने का मिशन शुरू किया। रायपुर के एक बड़े अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। मिथलेश के अनुसार पीठ समेत शरीर के कई हिस्सों में उसे आराम मिला है। महीने में एक बार बीआरसी के साथ इलाज कराने आती है और महीनेभर की दवा ले जाती है।

रायपुर में खुलेगा राज्य संसाधन केंद्र

मुख्यमंत्रीडॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजधानी के पास डूमरतराई में राज्य संसाधन केंद्र खोला जाएगा। यहां ऐसे बच्चों को प्रशिक्षण के साथ उपकरण इलाज की सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएगी। राज्यभर में शिविर लगाकर पहले ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी। यह पांच सालाना कार्ययोजना होगी। एक अनुमान के मुताबिक राज्य में ऐसे लगभग 60 हजार बच्चे हैं। इनमें सुकमा, दंतेवाड़ा के बच्चे शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सर्व शिक्षा अभियान की समावेशी शिक्षा योजना के तहत इन निशक्त बच्चों का अभिनंदन किया। स्थानीय जे.आर.दानी शासकीय कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल के सभाकक्ष में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया था। समारोह में स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप और लोकसभा सांसद रमेश बैस और महापौर प्रमोद दुबे विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।