बच्चों को संस्कारवान बनाएं: पं. सरस्वती
बच्चोंके अंत:करण में द्वेष की भावना भरें। उन्हें संस्कारवान बनाएं। क्योंकि घृणा द्वेष के बीज अच्छे फल नहीं देते।
यह बात बात महाराणा प्रताप धर्मशाला में जारी श्रीमदभागवत कथा में वृंदावनधाम केे पं. श्रवणानंद सरस्वती ने कही। ठाकुरदेव मंदिर समिति के तत्वावधान में आयोजित भागवत कथा में पं. सरस्वती ने राजा दक्ष की कथा सुनाते हुए कहा अभिमान हमेशा दुख देता है। अभिमानी अपना सम्मान खोजता है। मैं घमंड का प्रतीक है। राजा दक्ष हमेशा मैं कहता था इसीलिए उसे बकरी का सिर मिला। कथावाचक ने सती की कथा सुनाते हुए बताया कि राजा दक्ष के अभियान अधर्म के कारण सती अग्नि में जलकर भस्म हो गई। उन्होंने बताया जिनसे द्वेष हो जाए उनके सद्गुण नहीं दिखते। वहींं जिनसे लाभ मिले उनके दुर्गुण नहीं नजर आतेे। जिस तरह राजा दक्ष को शंकर से द्वेष था। उन्हें शंकर के सद्गुण नजर नहीं आए। कथा वाचक ने कहा जो धन, धर्म से कमाया जाता है वह पुरखों तक चलता है। मनमाने ढंग से कमाया गया धन नहीं टिकता। पं. सरस्वती ने ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा अधर्म ज्यादा दिन तक नहीं टिकता। हिरण्यकश्यप को मिले अमरत्व के वरदान के बाद भी विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर उसका वध किया। कथा के दौरान भक्त प्रहलाद नरसिंह अवतार की झांकी निकाली गई। आयोजन में पप्पू सरदार, अनिल जायसवाल, सुभाष अग्रवाल, चंटु अग्रवाल, आयोजन समिति के सदस्य जुटे हैं।
प्रताप धर्मशाला में जारी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्त प्रह्लाद नरसिंह अवतार की झांकी सजाई गई।