मामा के घर पढ़ रहे...
मामा के घर पढ़ रहे...
हादसेमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रदीप को भी साधारण चोंटें आई। घटनास्थल के करीब ही मस्तूरी पंचायत में जीतने वाले सरपंच का शपथ-ग्रहण समारोह चल रहा था। यहां काफी भीड़ थी। मौजूद लोगों को हादसे की जानकारी हुई तो उन्होंने चक्काजाम कर दिया। इधर कुछ लोगों ने भाग रहे ट्रक का पीछा कर उसे रोका और थाने लेकर आए। जाम कर रहे आक्रोशित लोगों को पुलिस ने समझाइश देने की कोशिश की पर सफलता नहीं मिली। लोग मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। घंटेभर बाद तहसीलदार ने आकर 10 हजार रुपए दिए, तब जाम हटा। पुलिस ने शव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजकर पोस्टमॉर्टम करवाया। प्रदीप की रिपोर्ट पर पुलिस ने ट्रक चालक अरुण कुमार सिंह बिहार 33वर्ष के खिलाफ धारा 304ए के तहत जुर्म दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। ट्रक खाली था और चालक इसे लेकर कोयला भरने रायगढ़ के छाल जा रहा था।
अन्यायहोने पर...
वहीं,राज्य शासन की ओर से बताया गया कि अवार्ड पास होने और राशि जमा होने के बाद भू-अर्जन अधिकारी राशि नहीं लौटा सकते। ऐसी स्थिति में एक ही विकल्प बचता है कि वे याचिकाकर्ताओं को मुआवजे का भुगतान करें।
खदानमें मजदूर...
मजदूरउत्तरप्रदेश के थाना देवरगांव क्षेत्र के ग्राम खोरेगांव का रहने वाला था। उसके शव को उसी हालत में उत्तरप्रदेश के गृहग्राम भेज दिया गया। खदान के मुंशी मध्यप्रदेश के अनूपपुर निवासी गौरव पिता राजीव लोचन के अनुसार मृतक का साला बलिराम उसके शव को लेकर गया है।
अंतिमसंस्कार के साथ ही नष्ट हो जाएगा सबूत: पुलिसको अपराध होने की जानकारी हुई, इसके बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। शव का अंतिम संस्कार से रोकने के लिए भी कोई प्रयास नहीं किया गया। पुलिस जांच शुरू करेगी, तब तक सबूत ही नष्ट हो जाएगा। ऐसे में मामले में पुलिस की मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
चक्काजाम:कांग्रेसियों पर...
पुलिसने कांग्रेस नेता बसंत शर्मा, अमित तिवारी, तूल सिंह, दिलेश्वर सिंह, राम मोहन, श्याम साहू, अनिल सिंह, हेमंत सिंह, सुशीला, इतवारा बाई, कुसुम, गुरु बाई और राम्हीन बाई के खिलाफ आईपीसी की धारा 341 के तहत मामला दर्ज किया था। सभी आरोपियों ने कोर्ट में जुर्म कबूल कर लिया था। सुनवाई के बाद बुधवार को दिए गए फैसले में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी मो. जहांगीर तिगाला की कोर्ट ने पिछले 19 सालों से सुनवाई के दौरान आरोपियों के नियमित तौर पर उपस्थित होने और इस दौरान मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रूप से नुकसान को ध्यान में रखते हुए 100-100 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर सात दिन कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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