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राष्ट्रभाषा हिंदी पर मंडरा रहा है अशुद्धि का साया
बुद्धिजीवीनागरिक सत्यनारायण शर्मा का कहना है कि स्कूल ,कालेजों में हिन्दी के बीच-बीच में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। वर्तनी अशुद्धि पर किसी का ध्यान नहीं है। समझाने के लिए अध्यापक को भी हिन्दी का ज्ञान होना चाहिए। हिन्दी सुधारने के लिए शिक्षा विभाग को समय समय पर ठोस प्रयास करने चाहिए। श्री शर्मा ने कहा कि स्कूल ,कालेजों में बोलते समय अंग्रेजी हिन्दी का प्रयोग इस तरह किया जाता है जैसे कोई खिचड़ी भाषा है। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिन्दी में हस्ताक्षर करना अपमान समझते हैं। हमारी मातृ भाषा की इतनी उपेक्षा से यह कैसे जीवित रहेगी इस बात को सभी को सोचने की जरूरत है। हिन्दी दिवस पर आयोजित गोष्ठी के इस कार्यक्रम में श्रवण अग्रवाल, सुश्री र|ा पैकरा, जगन्नाथ गुप्ता, विजय शर्मा, ललित शर्मा, प्रविण शर्मा सहित अनेक बुद्धिजीवी लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
भास्कर न्यूज | पत्थलगांव
राष्ट्रभाषा का गौरव रखने वाली हिन्दी पर अब शुद्धता का ही संकट गया है। स्कूलों में वर्तनी गत अशुद्धियों के साथ पढ़ा रहे शिक्षक हिन्दी का प्रारंभिक ज्ञान ही बच्चों को ठीक से नहीं दे पा रहे हैं।उक्त बातें रविवार को हिन्दी दिवस पर ठाकुर शोभासिंह महाविद्यालय में आयोजित गोष्ठी में पूर्व विधायक रामपुकार सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के शब्दों की घुसपैठ ने देवनागरी लिपि वाली शुध्द हिन्दी का स्वरूप ही बदल दिया है। हिन्दी की वर्तमान स्थिति को देख कर चिंता होने लगती है।
श्री सिंह ने कहा कि स्कूलों में हिन्दी की प्रारंभिक शिक्षा पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बच्चे वर्तनीगत गलतियां कर रहे हैं तो उन्हें सुधार करने वाला भी कोई नहीं है। देखा गया है कि अधिकांश स्कूलों में शिक्षक ही अशुध्द हिन्दी लिखने के साथ पढ़ा भी रहे हैं। श्री सिंह ने कहा कि पहले हिन्दी की पढ़ाई को शुद्धता के साथ लिखाया और पढ़ाया जाता था। परीक्षा में कॉपियां जांचते वक्त इन्हीं बातों को गौर से देखा जाता था। लेकिन अब सामान्य बोलचाल में भी अंग्रेजी शब्दों के प्रयोग से प्रचलित हिन्दी का स्वरूप ही बदल गया है। साहित्य के मर्मज्ञ इसके लिए चिंतित तो हैं पर वे कर कुछ नहीं पा रहे हैं। इस गोष्ठी में स्थानीय उद्योगपति आशिष अग्रवाल ने अपनी जर्मन की यात्रा का स्मरण सुनाते हुए कहा कि हिन्दी अब विश्व