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सभी कमर कस लें, तो बंद हो सकता है शराब का ठेका: साय
किसीगांव के विकास के लिए गांव का नशामुक्त होना जरूरी है। यह तभी होगा, पूरे गांव के लोग एकजुट होंगे। गांव में बनाई जा रही कच्ची शराब तो छोडि़ए, अगर लोग कमर कस लें, तो सरकारी ठेका भी बंद हो सकता है। यह बातें पूर्व संसदीय सचिव भरत साय ने कहीं। वे रविवार को पुराइनबंध के नशामुक्ति महिला समूह द्वारा आयोजित विशेष बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दो साल पहले से समूह की महिलाएं नशामुक्ति के लिए अच्छा कार्य कर रहीं हैं।
वे अब भी डटी हुई हैं। पर उन्हें युवा वर्ग ग्रामीणों के शत प्रतिशत सहयोग की जरूरत है। अगर ऐसा हो जाए, तो इस क्षेत्र के विकास को कोई रोक नहीं सकता। बैठक को पत्थलगांव सीईओ भजन साय ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा शासन द्वारा दिए गए 5 लीटर महुआ शराब की छूट का लोग नाजायज फायदा उठा रहे हैं और आदिवासी समाज नशा के कारण बर्बाद हो रहा है। यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है। जिससे पेसा एक्ट के तहत पंचायत द्वारा सर्व समिति से जो भी प्रस्ताव होता है, उसे शासन भी मान्य करता है। सरपंच कीर्तन सास ने लोगों से आह्वान किया कि वे खुलकर नशे के विरोध में सामने आएं।
उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में नशाखोरी चरम सीमा में थी। यहां हाई स्कूल संचालित होने के बावजूद बच्चों की रुचि पढ़ाई में नहीं थी। बच्चे से लेकर बड़े तक नशा के आदि हो रहे थे। जिससे क्षेत्र में रोज झगड़ा-झंझट होना आम बात हो गई थी। विशेषकर महिलाओं को कई तरह की प्रताड़नाओं से गुजरना पड़ता था। जिससे 26 अगस्त 2012 को चंद महिलाओं ने नशामुक्ति समूह का गठन किया। महिलाएं सप्ताह में एक दिन गुरूवार को नियमित बैठक कर एवं लोगों को समझाने का प्रयास करती हैं। साल भर के अंदर साकों, मृगखोल, अमडीहा सहित आसपास की सैकडों महिलाएं इससे जुड़ी हैं। वे कई माध्यमों से नशा के विरोध में अभियान चला रहीं हैं। बैठक में बीडीसी हेमंती साय, भजन साय, बिहारी साय, परमेश्वर साय, समूह की अध्यक्ष तिलक मनी, उपाध्यक्ष अनिता पैकरा, कोषाध्यक्ष कौशल्या बाई, ससमावती, मंझनी बाई, लीलावती, फुलोमनी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। कार्यक्रम में सचिव जगदीश सिंह की अहम भूमिका रही।
बैठक में उपस्थित महिलाएं
झेलना पड़ा विरोध
नशामुक्तिके लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाने पर महिलाओं को अपनों के ही विरोध का सामना करना पड़ा। शराबी पति के हाथों मार खानी पड़ी। इन सब