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बगैर स्वीकृति व उधार में टायलेट बनाने के खिलाफ सरपंचों ने सौंपा ज्ञापन

5 वर्ष पहले
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स्वच्छ भारत मिशन अभियान के लिए घर-घर शौचालय निर्माण से पहले पंचायतों को शा.स्वीकृति व आबंटन राशि नहीं मिल पाने से सोमवार को सरपंचों ने जनपद कार्यालय में विरोध प्रकट करते हुए ज्ञापन सौंपा। पत्थलगांव जनपद अंतर्गत कुल 83 ग्राम पंचायतों में से महज 22 ग्राम पंचायतों को ही शौचालय निर्माण के लिए शा. स्वीकृति मिल पाई है। इसमें भी आबंटन नहीं मिल पाने से सरपंचों को चौदहवें वित्त की राशि और पंचायत का आकस्मिक मद से खर्च करना पड़ रहा है। शेष पेज 12





सरपंच संघ के अध्यक्ष सुकृत सिंह ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत व्यापारियों से उधार में निर्माण सामग्री लेकर जगह-जगह सरपंच और सचिव को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शौचालय निर्माण को लेकर विरोध कर रहे इन सरपंचों का कहना था कि पत्थलगांव जनपद अंतर्गत कुल 83 ग्राम पंचायतों में से महज 22 ग्राम पंचायतों को ही शौचालय निर्माण के लिए शासकीय स्वीकृति मिल पाई है। इसमें भी आबंटन नहीं मिल पाने से सरपंचों को चौदहवें वित्त की राशि और पंचायत का आकस्मिक मद से खर्च करना पड़ रहा है। इस विकासखंड में शेष 61 ग्राम पंचायतों में सरपंचों से बगैर स्वीकृति के ही शौचालय निर्माण के भारी भरकम लक्ष्य पूरा करने के लिए अधिकारियों द्वारा दबाव दिया जा रहा है। कई जगह तो पंचायत अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंच को पद से बर्खास्त करने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

इस मामले में सरपंचों ने अपनी समस्या का ज्ञापन दिया है। सरपंचों के प्रतिनिधि मंडल को इस संबंध में कलेक्टर से मुलाकात करने का सुझाव दिया गया है। प्रताप विजय खेस, एसडीएम, पत्थलगांव

विरोध जताने जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे सरपंच

उधार में सामग्री की दोगुनी दर
महिलाओं सरपंचों का कहना है कि बगैर स्वीकृति के उधार में शौचालय निर्माण की सामग्री खरीदी करने से दुकानदार भी उनसे मनमाना मूल्य वसूल रहे हैं। इस का खामियाजा गरीब उपभोक्ता को ही वहन करना पड़ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन को एक बेहतर अभियान बताते हुए इन सरपंचों का कहना था कि इसके लिए प्रशासनिक अमला को पहले आबंटन की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ प्रगति भी दिखाई देगी। ग्राम पंचायत के सरपंचों का कहना था कि स्वच्छता अभियान में उन्हें दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

काम छोड़ने की चेतावनी
शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृति और आबंटन का अभाव को लेकर विरोध जता रहे सरपंचों ने एसडीएम कार्यालय पहुंच कर अपनी 4 सूत्रीय मांगों को लेकर एक ज्ञापन दिया। इस दौरान ग्राम पंचायत चंदरपुर की सरपंच शोभादेवी, पंडरीपानी की सुशीला सिदार, खरकट्टा की चंद्रवती पोर्ते, घरजियाबथान के तिरपन एक्का के अलावा दूर दराज की ग्राम पंचायत से भी कई सरपंच पहुंचे थे। सरपंचों ने कहा कि जब तक आबंटन नहीं मिलेगा, तब तक शौचालय निर्माण का काम को अधूरा छोड़ कर खाली बैठ जाएंगे।

महिला सरपंचों का घर से निकलना दूभर
दबाव के चलते महिला सरपंचों का घर से निकलना दूभर हो गया है। जनपद कार्यालय के समक्ष विरोध का स्वर तेज करने में सबसे अधिक महिला सरपंच पहुंची हुई थी। महिला जनप्रतिनिधियों का कहना था कि जिस ग्राम पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है, वहां पर गांव के ज्यादातर लोग आज भी खुले में ही शौच को जा रहे हैं। सरपंच संघ के अध्यक्ष सुकृत सिंह ने कहा कि जिस ग्राम पंचायत में सभी गरीब तबका के घरों में शौचालय निर्माण का काम पूरा करा दिया गया है, वहां महज 20 प्रतिशत ही राशि का मुश्किल से भुगतान हो पाया है। इसके अलावा आनन-फानन में शौचालय निर्माण कराने के दौरान गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देने से ज्यादातर लोग आज भी खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। श्री सिंह ने कहा कि यदि पंचायत में समय पर प्रशासकीय स्वीकृति और आबंटन की व्यवस्था कर दी जाती तो अच्छे परिणाम सामने आ सकते थे।

विडंबना
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